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चाहे तुमको हम छूते हैं, चाहे तुमको किश करते हैं।लेकिन हम सच्चा प्यार, तुमसे नहीं करते हैं।।हाँ, नहीं करते हैं।।चाहे तुमको हम छूते हैं—————————।।

शीर्षक- हम सच्चा प्यार तुमसे नहीं करते हैं

चाहे तुमको हम छूते हैं, चाहे तुमको किश करते हैं।
लेकिन हम सच्चा प्यार, तुमसे नहीं करते हैं।।हाँ, नहीं करते हैं।।
चाहे तुमको हम छूते हैं—————————।।

हम इसकी वजहां कहते हैं, यह झूठ नहीं तुम मानो।
तुम अपनी रूह से पूछो, तुम अपने मन को जानो।।
तैयार हो तुम मेरे सँग चलने को, या नहीं बोलो-बोलो।
चाहे प्यार तुम करते हो, चाहे रोज हम मिलते हैं।।
लेकिन हम सच्चा प्यार, तुमसे नहीं करते हैं।।हाँ, नहीं करते हैं।।
चाहे तुमको हम छूते हैं————————।।

होगा जब तुम्हारा सामना, जिंदगी की सच्ची कहानी से।
तब नजर नहीं आयेगा प्यार, टपकेगा पसीना जवानी से।।
क्या कर सकोगे तुम मुकाबला, इस कल की तस्वीर का।
चाहे तुमको हंसी देते हैं, चाहे तुमको सँग रखते हैं।।
लेकिन हम सच्चा प्यार, तुमसे नहीं करते हैं।।हाँ, नहीं करते हैं।।
चाहे तुमको हम छूते हैं————————-।।

देगा नहीं सम्मान हमारे प्यार को जमाना, नफरत करेगा।
जीने नहीं देगा चैन से हमको, सितम हम पर करेगा।।
सच्चे प्रेमियों का यही हाल होता है, अपमान होता है।
चाहे दिल अपने मिलते हैं, चाहे हम तुमपे मरते हैं।।
लेकिन हम सच्चा प्यार, तुमसे नहीं करते हैं।।हाँ, नहीं करते हैं।।
चाहे तुमको हम छूते हैं————————-।।

शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

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