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नई दिल्ली – सत्य शाश्वत रक्षा सेना के राष्ट्रीय संयोजक और आध्यात्मिक चिंतक अजीत सिन्हा ने कहा कि जिन्हें धर्म की ज्ञान होती है वे धर्मज्ञानी कहे जाते हैं और धर्म वही है जिसे लोग धारण करते हैं

जब – जब होहियें धर्म के हानि तब – तब शस्त्र उठहियें धर्म ज्ञानी – अजीत सिन्हा

नई दिल्ली – सत्य शाश्वत रक्षा सेना के राष्ट्रीय संयोजक और आध्यात्मिक चिंतक अजीत सिन्हा ने कहा कि जिन्हें धर्म की ज्ञान होती है वे धर्मज्ञानी कहे जाते हैं और धर्म वही है जिसे लोग धारण करते हैं और जो सत्य धारण कर उसकी शरणागत रहते वे सनातन धर्म के अनुयायी होते हैं जिन्हें धर्म हिंसा तथैव च पहले पता होती है और बाद में अहिंसा परमो धर्मः को मानते हैं और जब – जब किसी ने भी सनातन धर्म पर कुठाराघात करने की कोशिश की है तब – तब धर्म ज्ञानियों को शास्त्र ने शस्त्र उठाने की अनुमती प्रदान की है क्योंकि धर्म ज्ञानी अपने धर्म की रक्षा करना जानते हैं और सनातन धर्म विरोधी तत्त्वों को पहचानते भी हैं। सनातन धर्म की ज्ञान के आधार पर मैं ये निश्चित रूप से कह सकता हूं कि दुनिया में केवल एक धर्म है जो मानवता सिखाती है और मानवीय मूल्यों की रक्षा करना भी जानती है और वो है सनातन धर्म।


आज के अन्य धर्म जो सनातन से ही निकले हैं वे पंथ हुआ करते थे और सनातन का भी भाग होते थे जिनमें सिक्ख और जैन धर्म भी है जो कालांतर में पंथ से धर्म में परिणत हो गये। लेकिन जिन्होंने अपनी धर्म में कट्टरता भर दी और सनातन धर्म और अन्य धर्म के अनुयायियों को टार्गेट करना शुरू कर दिया और इसके लिये तलवारों के जोर पे सलवार पहनाने का कार्य किया और महिलाओं और बच्चों पर अपने धर्म को फैलाने के लिए अत्याचार किया वह धर्म हो ही नहीं सकता है। और ऐसे तत्त्वों का सामाजिक और आर्थिक रूप से बहिष्कार ही उचित है और उनसे कोई सरोकार नहीं रखना ही ठीक है।
इसलिए ये कहना सही ही प्रतीत होता है कि जब – जब सनातन धर्म की हानि होती है तब – तब सनातन धर्म ज्ञानी शस्त्र को अपने धर्म की रक्षा हेतु उठाने को मजबूर ही होते हैं और इन परिस्तिथियों में आम सनातन धर्म के अनुयायियों को ऐसे धर्म ज्ञानियों को साथ देना ही चाहिये।

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