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पिछले वर्ष 19 जनवरी को हरजोरा घाट में शिकारियों द्वारा किए गए वन्यजीवों और विदेशी पक्षियों के शिकार के मामले में वन विभाग और पुलिस द्वारा की गई लापरवाही के बाद अब मामले की जांच नए सिरे से शुरू कर दी गई

छपी खबर पर असर

हरजोरा घाट शिकार मामले में नया मोड़, शिकारी पर कार्रवाई की तैयारी

शिकार में शामिल था रसूखदार शिकारी सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर के शहीद डीएसपी सतपाल सिंह हत्याकांड में भी जुड़ा रहा

वन विभाग और प्रशासन की चौतरफा दबाव के बाद नए सिरे से जांच शुरू, कड़ी कार्रवाई की उम्मीद

“वन विभाग के कर्मी मामले की जांच पड़ताल कर रहे हैं जांच के बाद हरजोरा घाट शिकार मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी दो दिनों से टीम के सदस्यों को स्थल जांच में भेजा जा रहा है जल्द ही हम इस मामले में ठोस निर्णय लिया जाएगा”।

सुधीर कुमार क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक भागलपुर

“भागलपुर के आसपास के इलाकों में हर वर्ष 300 से अधिक विदेशी प्रजातियों की पक्षी आते हैं लेकिन लौटते वक्त इसकी संख्या कम हो जाती है इनका शिकार बंदूक कीटनाशकों द्वारा किया जाता है परिणाम स्वरुप कई प्रजातियां पक्षी विलुप्त के कगार पर पहुंच गए हैं विभाग के अधिकारियों को सुरक्षा के और कड़े इंतजाम करने होंगे ।”

अरविंद मिश्रा सदस्य मुंबई नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी

भागलपुर ।

पिछले वर्ष 19 जनवरी को हरजोरा घाट में शिकारियों द्वारा किए गए वन्यजीवों और विदेशी पक्षियों के शिकार के मामले में वन विभाग और पुलिस द्वारा की गई लापरवाही के बाद अब मामले की जांच नए सिरे से शुरू कर दी गई है। वन मंत्री और विभागीय अधिकारियों के निर्देश पर शिकारी पर कार्रवाई का शिकंजा कसने की संभावना जताई जा रही है। यह मामला और भी दिलचस्प हो जाता है क्योंकि एक शिकारी का नाम सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर के शहीद डीएसपी सतपाल सिंह हत्याकांड से भी जुड़ा हुआ था। उच्च रसूख वाले शिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने में वन विभाग और पुलिस पहले कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहे थे, लेकिन अब अधिकारियों के दबाव के बाद मामले में गंभीरता से जांच शुरू की गई है।

शिकारियों ने शिकार करने के साथ अन्य कार्यक्रम भी किए थे
हरजोरा घाट शिकार मामले में शिकारियों ने केवल पक्षियों का शिकार ही नहीं किया, बल्कि इसके साथ-साथ टेंट और समियाना भी तैयार किया था। साथ ही, नर्तकियों की व्यवस्था भी की गई थी। इस घटना में राजद के पूर्व विधायक और आलमनगर के जमींदार जैसे रसूखदार लोग भी शामिल थे। शिकार में बुजा, चमका, कमनग्रीन शेक जैसे विदेशी पक्षियों का शिकार किया गया था। इस पूरी घटना को लेकर विभागीय अधिकारियों और पुलिस ने पहले कोई ठोस कदम नहीं उठाए, जिसका मुख्य कारण स्थानीय रसूखदारों का दबाव था।

सीमा विवाद का बहाना, कार्रवाई में हो रही थी रुकावट
मधेपुरा और भागलपुर पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करने से मना कर दिया था। पुलिस का कहना था कि घटना स्थल भागलपुर के सीमा में आता है, और इस वजह से वे मामले में कोई कदम नहीं उठा सकते थे। इस स्थिति में, 1 वर्ष तक कार्रवाई में कोई प्रगति नहीं हुई। हालांकि, अब मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (आरसीसीएफ) सुधीर कुमार ने इस मामले की जांच नए सिरे से शुरू की है और विभाग ने पूरे मामले को भागलपुर के मुख्य वन संरक्षक को सौंपा है।

प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारी की पहल
भागलपुर के प्रमंडलीय आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लिया और उन्होंने भागलपुर के जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करें। इसके साथ ही, वन विभाग के मंत्री और सचिव ने भी स्थानीय अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। दबाव बनने के बाद अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि शिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

विदेशी पक्षियों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में हर वर्ष 300 से अधिक विदेशी पक्षी आते हैं, लेकिन इनकी संख्या में हर साल कमी होती जा रही है। शिकारी द्वारा इन पक्षियों का शिकार और कीटनाशकों का उपयोग किए जाने से कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई हैं। मुंबई नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के सदस्य अरविंद मिश्रा ने कहा कि वन विभाग को इन पक्षियों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो कई प्रजातियां हमेशा के लिए विलुप्त हो सकती हैं।

शिकारी पर कार्रवाई की उम्मीद, जांच जारी
क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (आरसीसीएफ) सुधीर कुमार ने कहा कि वे इस मामले की जांच अपने स्तर से कर रहे हैं और जल्द ही इसके परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने बताया कि जांच दल के सदस्य स्थल पर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं और जल्द ही इस मामले में ठोस निर्णय लिया जाएगा।

हरजोरा घाट शिकार मामले में चौतरफा दबाव और नई जांच के बाद शिकारी पर कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है। वन विभाग और प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है, और अब कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं। यह जांच यह साबित करेगी कि अगर वन विभाग और पुलिस मिलकर काम करें, तो वन्यजीवों और विदेशी पक्षियों के संरक्षण में सफलता प्राप्त की जा सकती है।इस मामले में विभागीय और प्रशासनिक स्तर पर उठाए जा रहे कदमों से उम्मीद की जा रही है कि वन्यजीवों और पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।

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