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भोजपुरी कोकिल प्रो.शतीश की साहित्यिक विकास यात्रा

भोजपुरी कोकिल प्रो.शतीश की साहित्यिक विकास यात्रा
(28 मई जयंती पर विशेष आलेख)
सारण प्रमंडल के छपरा शहर अंतर्गत नवीगंज (दौलतगंज) मोहल्ला 28 मई 1926 को जन्मे सारण सपूत कविवर सतीश्वर सहाय वर्मा कविवर सतीश हिंदी भोजपुरी के लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार पिता स्व जुगेश्वर सहाय (जेलर साहब) माता स्व रामतपी देवी के छोटे पुत्र के रूप में जन्म लिया।बचपन से स्वर्गवासी माई के सुकंठ से सुनी पराती और लोक भजन की अमिट छाप एवं भोजपुरी के एक स्वनामध्य के छिड़ी कवि सम्मेलन में बेइज्जती देखकर आजीवन मृत्युपरांत हिंदी से मातृभाषा भोजपुरी में साहित्य रचना करने का संकल्प लिया।स्वभाव से संकोची एवं प्रचार से अलग रहने वाले व्यक्तित्व के धनी कवि सतीश जी 50 के दशक में हिंदी कवि के रूप में स्थापित हो चुके थे।इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम ए की शिक्षा ग्रहण के उपरांत डॉ हरिवंश राय बच्चन,डॉ रामकुमार वर्मा,महादेवी वर्मा,पंत जी,निराला जी के सानिध्य एवं संपर्क में आ चुके थे।उस समय धर्मयुग,दैनिक समाचार पत्र आज सहित हिंदी के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में छपने लगे थे।उनकी हिंदी गीत 1. “उसपार बजाई तूने साद की वंशी, इसपार हुआ राधा सा व्याकुल मन”2.”मोम सी पिघली शरद की चांदनी 3.जीवन का ले भार खड़ा मैं टूटे पुल का पाया हूं।इत्यादि रचनाए आकाशवाणी प्रभाग,वाराणसी,गोरखपुर,पटना से प्रसारित होने लगे थे।अब सतीश जी एक मुकाम हासिल कर चुके थे।1952 में गौतम ऋषि उच्च विद्यालय रिवीलगंज छपरा में उप प्राचार्य के रूप में योगदान दिए।1974 में बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर में जब भोजपुरी भाषा के रूप में मान्यता मिली तो प्रथम वैतनिक व्याख्याता सह विभागाध्यक्ष के रूप में लंगर सिंह कॉलेज में योगदान दिए।सन 1949 में आकाशवाणी पटना के चौपाल कार्यक्रम के अंतर्गत लोकभाषा पथ करते हुए उनकी पहली भोजपुरी गीत “दिनवा बीतल ओढ़ी कारी रे चदरिया !सूरज लुकावेलि सोनवा गगरिया !!” प्रसारित हुई।उसके बाद भोजपुरी भाषा साहित्य के अन्य विधाओं में गजल ,मौसमी गीत,नाटक,एकाकी ,ललित निबंध का सफल लेखन किया।भोजपुरी नाटक “माटी के दिया में घी के बाती “बेहद लोकप्रिय , प्रसिद्ध एवं प्रकाशित हुई।1972 में इस नाटक पर शिववचन सिंह पुरस्कार भी प्राप्त हुए।प्रिय मनोरंजन के द्वारा दिए गए एवं सम्मानित “भोजपुरी कोकिला” के उपनाम से मृत्युपरांत जाने गए।भोजपुरी हिंदी में गीतों का प्रथम संकलन”कठपुतली”प्रकाशित हुई।भोजपुरी गजल संग्रह जल के धारा में दियना हीरा- मोती काव्य संग्रह विश्वविद्यालय गद्य- पद्य संग्रह में कई रचनाएं संकलित हुई हैं।भोजपुरी जनपद पहरुआ अंजोर आर्यावर्त,आज इत्यादि पत्र पत्रिकाओं में लगातार छपते रहे ।1962 में मायानगरी बंबई में निर्माता निर्देशक विनय सिंहा के संपर्क में आए।कई हिंदी भोजपुरी फिल्म का गीत एवं संवाद – पटकथा लेखन किए।इनकी हिंदी नाटक जय जवान जय किसान का मंचन छपरा चित्रगुप्त समिति द्वारा महेंद्र मंदिर (ज्योति सिनेमा) में डॉ.रसिक बिहारी वर्मा के निर्देशन में हुआ।कालांतर में इसी कहानी पर आधारित मनोज कुमार ने उपकार फिल्म का निर्माण किया। सुन रे बालम अंगना भइल विदेस कब होइहे गंवनवां हमार गंगा सासु ननद भौजाई आदि हिंदी भोजपुरी फिल्मों का गीत,पटकथा संवाद की रचना की।भाग्य ने साथ नहीं दिया,बम्बई रास नहीं आई फिर छपरा लौटकर आ गए।छपरा के प्रकाशित प्रथम भोजपुरी मासिक पत्रिका माटी के बोली के प्रधान संपादक दैनिक पहरूआ के सह संपादक छपरा से प्रकाशित हिंदी मासिक पत्रिका आदर्श किसान के प्रधान संपादक स्व.ईश्वर शरण अधिवक्ता एवं सतीश जी सह उपसंपादक के रूप में रहे। भोजपुरी गौरव राहुल सम्मान भोजपुरी रत्न इत्यादि से विभिन्न साहित्यिक, सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किए गए।
सारण जिला भोजपुरी साहित्य सम्मेलन 14 वाँ अधिवेशन अमनौर के अध्यक्ष,भोजपुरी सेवा संघ वाराणसी के आजीवन सदस्य बिहार सरकार भोजपुरी अकादमी पटना के कार्यसमिति के सदस्य,बिहार अंतर विश्व विद्यालय पाठ्यक्रम चयन समिति के सदस्य,अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन पटना के आजीवन सदस्य।बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर,पटना विश्वविद्यालय,मगध विश्वविद्यालय गया इत्यादि के पाठ्यक्रम निर्धारण समिति के सम्मानित सदस्य के रूप में जीवन पर्यंत योगदान दिए।इनकी प्रसिद्ध गजल जल के धारा में दियना हमार जिनगी!मिट गइल बा सतीशो के मन के भरम! कहियो मानी ना कहना हमार जिनगी!! रही।
आखिरकार भोजपुरी गजल के बेताज बादशाह सतीश जी असामयिक निधन कार्तिक माह अक्षय नवमी 1 नवंबर 1995 में छपरा में हुई।आज छपरा के साहित्यिक,सांस्कृतिक,सामाजिक संस्थाओं के द्वारा उनको भूल जाना साहित्यिकी उदासीनता को दर्शाती है।ऐसे साहित्यकारों ने जो अपनी कलम में साहित्य रचना कर सारण (छपरा)बिहार का नाम देश के फलक पर किया।
चित्रगुप्त वंश के प्रो.सतीश जी को मिशन टू करोड़ चित्रांश अंतर्राष्ट्रीय के राजेंद्र कर्ण,अनिल कर्ण,मनोज लाल दास मनु,अनिलेश्वर माधव,पंकज कर्ण,विशाल गौरव,राजेश कंठ,रमाशंकर श्रीवास्तव,बी के मल्लिक,श्वेता श्रीवास्तव,आशा चौधरी,वंदना दत्त डॉली,नेपाल से चितरंजन श्रीवास्तव,राजकुमार श्रीवास्तव,राजकुमार दास, पार्थों सरकार,दिलीप दास एवं साहित्यकार डॉ एस के शमा ने पुण्य तिथि पर ऐसे हस्ती को नमन किया।

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