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रेडियो स्टेशन रोड, पूर्णिया में 14 जनवरी को कमली प्रसाद सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर एक नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर और एचएमपीवी (ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस) के प्रति जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया

कमली प्रसाद सिंह की पुण्यतिथि पर नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित

एचएमपीवी वायरस के प्रति किया गया जागरूक

डॉ. अजीत प्रसाद सिंह ने एचएमपीवी वायरस के प्रभाव और बचाव के बताए टिप्स

पूर्णिया ।

रेडियो स्टेशन रोड, पूर्णिया में 14 जनवरी को कमली प्रसाद सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर एक नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर और एचएमपीवी (ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस) के प्रति जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन कमली प्रसाद सिंह ट्रस्ट के ट्रस्टी पुत्र और “सहयोग” के अध्यक्ष डॉ. अजीत प्रसाद सिंह द्वारा किया गया, जिसमें स्थानीय समुदाय के अनेक लोगों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का आरंभ मुख्य अतिथि डॉ. अजीत प्रसाद सिंह द्वारा लोगों का स्वागत करने और स्वास्थ्य शिविर की शुरुआत से हुआ। डॉ. अजीत ने शिविर में उपस्थित लोगों की नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच की और उन्हें आवश्यक दवाएं प्रदान कीं। शिविर में सर्दी-जुकाम, बुखार, जोड़ों के दर्द, और पेट संबंधी समस्याओं से ग्रस्त मरीज अधिक संख्या में पहुंचे। इस दौरान कुछ जरूरी सामग्री भी जरूरतमंदों के बीच वितरित की गई।

एचएमपीवी वायरस के प्रति जागरूकता अभियान

कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण का हिस्सा था एचएमपीवी (ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस) वायरस के बारे में लोगों को जागरूक करना। डॉ. अजीत ने इस वायरस के श्वसन तंत्र पर प्रभाव के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह वायरस खासकर फेफड़ों और श्वसन नलियों को प्रभावित करता है और इसके लक्षण सामान्य सर्दी और फ्लू जैसे हो सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा, “एचएमपीवी वायरस उन व्यक्तियों के लिए अधिक खतरनाक हो सकता है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो, जैसे छोटे बच्चे, वृद्ध लोग, और जिनको पहले से श्वसन संबंधी बीमारियां हों।” इसके अलावा, डॉ. अजीत ने वायरस के लक्षणों की जानकारी दी, जिनमें तेज बुखार (103°F से अधिक), सांस लेने में कठिनाई, नाखूनों, होंठों और त्वचा का नीला पड़ना, सर्दी-जुकाम, खांसी, घरघराहट और गले में खराश शामिल हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि एचएमपीवी संक्रमण आमतौर पर हल्का होता है, लेकिन गंभीर मामलों में निमोनिया और ब्रोंकोलाइटिस जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। इस वायरस से बचने के लिए, उन्होंने कुछ सुरक्षा उपायों पर भी प्रकाश डाला, जैसे मास्क पहनना, हाथों को नियमित रूप से धोना, और भीड़-भाड़ वाले स्थानों से बचना।

एचएमपीवी वायरस से बचाव के उपाय

डॉ. अजीत ने एचएमपीवी वायरस से बचने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए:

मास्क का नियमित उपयोग करें, खासकर भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर।

हाथों को साबुन और पानी से बार-बार धोएं, और आंख, नाक, मुंह को कम से कम छूने की कोशिश करें।

खांसी या छींक के दौरान मुंह और नाक को ढकें।

यदि किसी को एचएमपीवी के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और खुद को दूसरों से अलग रखें ताकि संक्रमण न फैले।

उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी व्यक्ति को एचएमपीवी वायरस से संबंधित गंभीर लक्षण महसूस हों, तो उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना और ऑक्सीजन थेरेपी की आवश्यकता हो सकती है।

कार्यक्रम में संस्थान के सदस्य का योगदान

कार्यक्रम की सफलता में संस्थान के सदस्य सहायक राजा कुमार, पार्वती कुमारी, रोशन कुमार, सुरेश मुखिया, देवेंद्र कुमार, भारती मोनू कुमार, आफरीन, विशाल कुमार, सतीश, संजीवनी, प्रीतम, डॉ. राजेश, रूपेश गांधी, रंजीत, रमन, मनी गिरी और गोस्वामी का योगदान सराहनीय रहा। इन सभी ने कार्यक्रम के संचालन और आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संदेश

कार्यक्रम के अंत में डॉ. अजीत प्रसाद सिंह ने उपस्थित सभी लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा, “स्वास्थ्य से संबंधित जागरूकता अभियान का आयोजन समय-समय पर करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग हों और गंभीर बीमारियों से बच सकें।” उन्होंने यह भी कहा कि एचएमपीवी जैसे वायरस के प्रति समाज को जागरूक करना एक जिम्मेदारी है, और इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से ही हम समाज में स्वास्थ्य की दिशा में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

इस कार्यक्रम ने न केवल लोगों को स्वास्थ्य जांच का लाभ प्रदान किया, बल्कि एचएमपीवी वायरस के प्रति जागरूकता बढ़ाकर एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया।

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