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शीर्षक- मैं तो देखता हूँ तुझमें–

मैं तो देखता हूँ तुझमें—————,
आने वाले भविष्य की उज्ज्वल तस्वीर,
एक उमंग,जोश और आशा की रोशनी,

शीर्षक- मैं तो देखता हूँ तुझमें—————

मैं तो देखता हूँ तुझमें—————,
आने वाले भविष्य की उज्ज्वल तस्वीर,
एक उमंग,जोश और आशा की रोशनी,
शेष क्या कहते हैं तुम्हारे बारे में,
इससे मुझको कोई मतलब नहीं,
मैंने तो पाया है अक्सर तुम्हारे मन में,
पवित्र प्रेम, निःस्वार्थ हृदय और अपनापन,
किसी के प्रति सच्ची श्रद्धा, स्वच्छ ईमान,
क्या कहते हैं लोग तुम्हारे कर्मों के लिए,
इससे मुझको कोई मतलब नहीं,
लेकिन तुम्हारे प्रति मेरी प्रीत,
कभी कम नहीं होगी,
मैंने तो यह निष्कर्ष निकाला है,
दिखाई नहीं किसी ने तुमको सच्ची राह,
बताई नहीं किसी ने तुमको हकीकत,
किस तरह तुम्हारी जिंदगी सुरभित होगी,
कि तुम छोड़ सके दूसरों के लिए अपने निशां,
ताकि कल लोग तुम्हारी करें जय जयकार।

मैं तो कहता हूँ तुमसे कि—————,
तुम खूब महको फूलों,
मैं तुमको सींचता रहूँगा,
जब तक मुझमें तक रहेगा,
तुम बनो रोशनवान चिरागों,
मैं तुमको बुझने नहीं दूंगा,
बढ़ते रहो तुम अपने पथ पर,
मंजिल तुमको जरूर मिलेगी,
मत छोड़ो अपनी उम्मीदें,
आबाद करों अपने सपनें,
जब तक हूँ मैं तुम्हारे साथ,
मैं तुमको निराश नहीं होने दूंगा,
हिम्मत, लगन और मेहनत तुझमें हो,
तुम पर लगा दाग मैं मिटा दूंगा,
दुनिया क्या कहती है तुम्हारे बारे में,
इससे मुझको कोई मतलब नहीं,
हाँ, मैं तुमसे नाउम्मीद नहीं हूँ ,
मैं तो देखता हूँ तुझमें——————।

शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

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