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वोटर लिस्ट से नाम काटने की साजिश चल रही हैं, कल नागरिकता छीनी जाएगी, फिर रोजगार, राशन, शिक्षा सब कुछ खत्म कर दिया जाएगा। ये कोई साधारण पुनरीक्षण नहीं, बल्कि एक सोची-समझी बहुजन विरोधी साजिश है!”

वोटर लिस्ट से नाम काटने की साजिश चल रही हैं, कल नागरिकता छीनी जाएगी, फिर रोजगार, राशन, शिक्षा सब कुछ खत्म कर दिया जाएगा। ये कोई साधारण पुनरीक्षण नहीं, बल्कि एक सोची-समझी बहुजन विरोधी साजिश है!”

प्रमाण पत्र दिखाने की बाध्यता दलित, पिछड़ा, आदिवासी, अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ है जिनके पास अब भी कई जरूरी कागजात नहीं हैं!

इन समुदायों के पास जो कागजात हैं वो आधार कार्ड, राशनकार्ड, मनरेगा कार्ड, रोजगार कार्ड हैं, जो चुनाव आयोग द्वारा मान्य नहीं हैं।

ये प्रक्रिया बिल्कुल वैसी ही है जैसी NRC-CAA में अपनाई जाने वाली थी।

आगे आंदोलकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा

“जो समाज अपने वोट की रक्षा नहीं कर सकता, वो अपने समाज की बहन-बेटियों की रक्षा भी नहीं कर सकता।”

“आज सत्ता तुम्हारा वोट छीन रही है — कल तुम्हारी इज्जत, ज़मीन, भाषा, और जीवन छीन लेगी।”

चुनाव आयोग का गहन पुनिरिक्षण नीति बहुजन समाज का वोट प्रतिशत घटाने एवं सत्ता से बेदखल करने की साजिश है।

मान्यवर कांशीराम साहब ने कहा था —
“जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी!”

तो सवाल यह है — अगर संख्या ही घटा दी गई,
तो हिस्सेदारी कैसे बचेगी?

मौजूदा समय सड़क पर संघर्ष करने है।

सभी समाज के युवाओं, महिलाओं, किसानों, छात्रों और मजदूरों से अपील की है कि वे अपने अधिकार की लड़ाई में आगे आए।

अंत में उन्होंने कहा जबतक गहन पुनरिक्षण नीति में बदलाव नहीं हो जाता एवं अनावश्यक प्रमाण पत्र की बाध्यता समाप्त नहीं हो जाती तबतक लड़ाई जारी रखनी होगी।

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