पटना

विधान मंडल सत्र के बीच धरना-प्रदर्शन की तैयारी, वर्षों से लंबित मांग पर सरकार की चुप्पी से शिक्षकों में आक्रोश

विधान मंडल सत्र के बीच धरना-प्रदर्शन की तैयारी, वर्षों से लंबित मांग पर सरकार की चुप्पी से शिक्षकों में आक्रोश

नियमितीकरण नहीं तो आंदोलन तेज! अतिथि शिक्षकों का अल्टीमेटम, 16-17 फरवरी को पटना बनेगा संघर्ष का केंद्र

विधान मंडल सत्र के बीच धरना-प्रदर्शन की तैयारी, वर्षों से लंबित मांग पर सरकार की चुप्पी से शिक्षकों में आक्रोश

पटना।

बिहार राज्य विश्वविद्यालय अतिथि सहायक प्राध्यापक संघ ने सेवा नियमितीकरण की मांग को लेकर आंदोलन का शंखनाद कर दिया है। पटना में आयोजित अध्यक्ष मंडल की बैठक में तय किया गया कि 16 और 17 फरवरी को बिहार विधान मंडल सत्र के दौरान राजधानी में जोरदार धरना-प्रदर्शन कर सरकार को जगाया जाएगा।
संघ का कहना है कि लंबे समय से सेवा समायोजन की मांग उठाई जा रही है, लेकिन सरकार अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं ले सकी है। इससे विश्वविद्यालयों में पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों के बीच गहरा असंतोष है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि जहां अन्य स्तरों पर कार्यरत कॉन्ट्रैक्ट और अस्थायी कर्मचारियों को सुविधाएं और सेवा विस्तार मिल चुका है, वहीं उच्च शिक्षण संस्थानों में कार्यरत योग्य अतिथि शिक्षक अब भी उपेक्षा का सामना कर रहे हैं।
संघ ने यह भी बताया कि बिहार विधान परिषद की शिक्षा समिति ने अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण की अनुशंसा शिक्षा विभाग को भेजी थी, परंतु उस पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई। नियुक्तियां स्वीकृत रिक्त पदों पर सरकार और यूजीसी के नियमों के तहत तथा आरक्षण रोस्टर का पालन करते हुए हुई हैं, इसलिए शिक्षक अपने अधिकार को न्यायसंगत मानते हैं।
अपनी आवाज को और बुलंद करने के लिए प्रांतीय संघ ने विधायकों, विधान पार्षदों और मंत्रियों से संपर्क अभियान चलाया है। साथ ही सभी विश्वविद्यालय इकाइयों से आह्वान किया गया है कि हर महाविद्यालय में बैठक कर धरना-प्रदर्शन में शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि सरकार तक एकजुट संदेश पहुंचे।
बैठक में संयोजक डॉ. सतीश कुमार दास के अलावा डॉ. मुकेश कुमार निराला, डॉ. ललित किशोर, डॉ. आदित्य आनंद, डॉ. संत कुमार और डॉ. आशुतोष समेत विभिन्न विश्वविद्यालयों के अध्यक्ष मौजूद रहे।
संघ ने साफ संकेत दिया है कि यदि मांगों पर जल्द पहल नहीं हुई तो यह आंदोलन और उग्र हो सकता है, जिससे राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है।

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