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अररिया बना संस्कृत शिक्षा का केंद्र—बोर्ड अध्यक्ष मृत्युंजय झा के स्वागत में जुटा सियासत और समाज

अररिया बना संस्कृत शिक्षा का केंद्र—बोर्ड अध्यक्ष मृत्युंजय झा के स्वागत में जुटा सियासत और समाज

मंत्री विजय मंडल और सांसद प्रदीप सिंह की मौजूदगी में हुआ सम्मान समारोह, संस्कृत शिक्षा को दी नई गति देने का संकल्प

अररिया।

सोमवार को अररिया एक बार फिर ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय झा के स्वागत में सियासत, शिक्षा और समाज एक मंच पर दिखाई दिए। ब्रज मोहन संस्कृत हाई स्कूल, दभड़ा के प्रांगण में आयोजित इस भव्य स्वागत एवं सम्मान समारोह में संस्कृत शिक्षा के भविष्य को लेकर गंभीर और सार्थक संवाद हुआ।

🔹 सियासी समर्थन ने बढ़ाया कार्यक्रम का कद

इस कार्यक्रम की गरिमा तब और बढ़ गई जब बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री विजय कुमार मंडल और अररिया के सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने स्वयं पहुंचकर अध्यक्ष मृत्युंजय झा को सम्मानित किया। दोनों नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संस्कृत शिक्षा के विकास में सरकार हरसंभव सहयोग करेगी।

“संस्कृत हमारी संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्र की आत्मा है। इसे उपेक्षित नहीं रहने दिया जा सकता।” — विजय
कुमार मंडल

“आज का आयोजन आने वाले बदलाव का संकेत है। संस्कृत शिक्षक सिर्फ शिक्षक नहीं, संस्कृति के वाहक हैं।” — प्रदीप सिंह

🔹 संस्कृत शिक्षा को लेकर झा की सोच बनी प्रेरणा

बोर्ड अध्यक्ष मृत्युंजय झा ने कहा कि संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में गति, पारदर्शिता और गरिमा लाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

“संस्कृत शिक्षा को ‘वैकल्पिक’ नहीं, ‘मुख्यधारा’ का हिस्सा बनाना है।” — मृत्युंजय झा

उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं पर गंभीर रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया कि परीक्षाओं, प्रमाणपत्रों और मान्यता की प्रक्रिया में आने वाली अड़चनों को शीघ्र दूर किया जाएगा।

🔹 शिक्षकों का जोश और जनता का जुड़ाव बना कार्यक्रम को ऐतिहासिक

संस्कार, सम्मान और संगठित संदेश के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में शिक्षक, विद्यालय पदाधिकारी, शिक्षाविद् और ग्रामीण जन शामिल हुए। संस्कृत बोर्ड से संबद्ध सीमांचल क्षेत्र के सभी प्रमुख विद्यालयों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

प्रत्येक वक्ता की वाणी से एक ही भावना झलक रही थी—“संस्कृत शिक्षा अब संघर्ष से समाधान की ओर बढ़ रही है।”

🔹 क्यों यह कार्यक्रम बना चर्चा का केंद्र?

बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री विजय कुमार मंडल और सांसद प्रदीप कुमार सिंह की मंच से घोषित सीधी प्रतिबद्धता

बोर्ड अध्यक्ष का जमीनी अनुभव और स्पष्ट दृष्टिकोण

शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी और संगठन की गोलबंदी

स्थानीय स्तर पर संस्कृत शिक्षा को लेकर दिखा अभूतपूर्व उत्साह

प्रधानाध्यापक श्री कमलेश झा ने सभी अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए इसे “संस्कृत शिक्षा के नवयुग की शुरुआत” बताया।

राजनीतिक संदेश स्पष्ट है:
संस्कृत शिक्षक अब चुप नहीं, संगठित हैं। नेतृत्व सक्षम है और समर्थन सियासी गलियारों से लेकर समाज के आंगन तक पहुँच चुका है।

यह सिर्फ एक स्वागत नहीं था — यह संस्कृत शिक्षा के पुनर्जागरण की हुंकार थी।

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