जिला पदाधिकारी तुषार सिंगला द्वारा जिले में कृषि महाविद्यालय के निर्माण हेतु जमीन सचिव कृषि विभाग, बिहार कराया उपलब्ध ।
अशोक पासवान ब्यूरो आपकी आवाज।
जिला पदाधिकारी बेगूसराय,तुषार सिंगला द्वारा बेगूसराय जिले में कृषि महाविद्यालय के निर्माण हेतु जमीन चिन्हित कर सचिव कृषि विभाग, बिहार पटना को उपलब्ध करा दिया गया है।
जिला पदाधिकारी के निर्देश पर अनुमंडल पदाधिकारी बलिया एवं अंचल अधिकारी साहेबपुर कमाल द्वारा जमीन चिन्हित कर भेजा गया था। अनुमंडल पदाधिकारी बलिया द्वारा भेजे गये पत्र में बताया गया कि प्रस्तावित स्थल बेगूसराय जिला के एनएच 31 एवं खगड़िया जिला के समीप है। कृषि महाविद्यालय निर्माण हेतु राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र अंतर्गत जमीन चिन्हित किया गया है।
बतातें चलें कि कृषि महाविद्यालय निर्माण विभिन्न फसलों एवं कृषि तकनीक के प्रदर्शन के लिए तथा प्रायोगिक खेती के लिए प्रक्षेत्र की आवश्यकता होती है, जो चिन्हित जमीन के आस-पास उपलब्ध है। बेगूसराय जिले में पूर्व से कुशमहौत पंचायत में मक्का अनुसंधान केन्द्र अवस्थित है, तथा इस जिले में रेशम अनुसंधान केन्द्र स्टेशन की स्थापना हेतु भी मंझौल अनुमंडल अंतर्गत जमीन जिलाधिकारी द्वारा हाल ही में उपलब्ध कराया गया है।
कृषि महाविद्यालय का निर्माण बेगूसराय ही नहीं आस-पास के जिले के लिए भी वरदान साबित होगा। इससे किसानों को खेती करने में काफी सहुलियत होगी। इसके कई महत्वपूर्ण फायदे है।
कृषि महाविद्यालय के निर्माण से कृषि क्षेत्र में शिक्षा के नए अवसर प्रदान करेगा, जिससे छात्रों को कृषि के क्षेत्र में ज्ञान और कौशल प्राप्त करने में मदद मिलेगी। कृषि महाविद्यालय में अनुसंधान कार्यों को बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे कृषि के क्षेत्र में नए और बेहतर तरीकों का विकास हो सकता है। शिक्षित छात्र कृषि उत्पादन में वृद्धि करने में मदद कर सकते हैं, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा में सुधार हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के अवसर प्रदान कर सकता है, जिससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। कृषि महाविद्यालय कृषि उद्योग के विकास में मदद कर सकता है, जिससे कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन में सुधार हो सकता है। कृषि महाविद्यालय के विशेषज्ञ कृषि नीति निर्माण में योगदान कर सकते हैं, जिससे देश की कृषि नीतियों में सुधार हो सकता है। कृषि महाविद्यालय में नवाचार और अनुसंधान कार्यों को बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे कृषि के क्षेत्र में नए और बेहतर तरीकों का विकास हो सकता है।


