दिल्ली के सीएम रेखा गुप्ता को बनाने के पीछे बी. जे. पी. का दूरगामी सोच है – डॉ. बी. के. मल्लिक

दिल्ली के सीएम रेखा गुप्ता को बनाने के पीछे बी. जे. पी. का दूरगामी सोच है – डॉ. बी. के. मल्लिक
दिल्ली के सीएम रेखा गुप्ता को बनाने के पीछे बीजेपी का दूरगामी सोच है। जिस तरह से छात्र राजनीति से आए तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री कल्याण और फिर दिल्ली के सीएम रेखा गुप्ता को बनाकर एक तीर से कई निशान साधने की कोशिश की है। रेखा गुप्ता के मुख्यमंत्री बनने से एवीबीपी में छात्रों को नया जोश आएगा जो आनेवाले पीढी भाजपा में जुड़ने का पहल करेगा क्योंकि लोगों को सामने दिखने वाला सीएम एक ज्वलंत उदाहरण होगा। दूसरा निशाना आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल के समर्थक वैश्य समाज को साधने में होगा। तीसरा निशाना यह होगा कि भारतीय जनता पार्टी में किसी भी कार्यकर्ता को सरकार में भूमिका बन सकता है। जिससे भाजपा सदस्यों में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। महिला मुख्यमंत्री के रूप रेखा गुप्ता को महिला वोटो को बढ़ाने में मदद मिलेगा।

पहली बार शालीमार बाग, दिल्ली से विधायक बनने जा रही रेखा गुप्ता जी के नाम की चर्चा दिल्ली के सी. एम. के रूप में शायद किसी ने पहले कभी नहीं सुनी होगी और उनका पार्षद से मुख्यमंत्री तक का सफर अवश्य ही राज्य के सत्ता की प्राप्ति में उच्चतम स्थान मानी जा सकती है। रेखा गुप्ता जी के नाम की घोषणा हो चुकी है जिन्हें संघ का भी समर्थन प्राप्त है और वे सनातन धर्म के अंतर्गत बनिया समाज से आती हैं जिनके सी. एम. बनाने के फैसले में केंद्रीय पर्यवेक्षक माननीय पाटलिपुत्र, बिहार से सांसद रविशंकर प्रसाद ने महत्तवपूर्ण भूमिका निभाई और इस तरह से उन्होंने बनिया समाज से आने वाले प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, संघ की नजरों में और अपने संसदीय क्षेत्र के बनिया समाज के नजरों में अपने ग्राफ को ऊंचा कर लिया है।
रेखा गुप्ता प्रधानमंत्री जी की खासमखास वैसी मुख्यमंत्री होंगी जो उनके आदेशों का अक्षरशः पालन करेंगी ऐसी सम्भावना व्यक्त करनी उचित ही होगी क्योंकि आज की राजनीति में जाति – धर्म का प्रभाव अमूमन देखने को मिलता ही है।
इनकी जीवनी पर नजर डालना उचित ही रहेगा। छात्र राजनीति, ए. बी. वी. पी. और आर. एस. एस. से जुड़ी बी. जे. पी. के नेता रेखा गुप्ता जी का जन्म 19 जुलाई 1974 को हरियाणा के जींद जिले में हुआ था और दो साल की उम्र में ही उनका परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत दिल्ली के दौलत राम काॅलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से शुरू हुआ और आगे जाकर वे भाजपा की राष्ट्रीय सचिव भी बनी और दिल्ली के मेयर की चुनाव भी उन्होंने आप पार्टी के शैली ओबेरॉय के विरुद्ध लड़ीं लेकिन वह मेयर का चुनाव हार गईं। लेकिन दिल्ली की सी. एम. बनकर उन्होंने अपने राजनीतिक कैरियर में अभी तक उच्चतम स्थान को हासिल किया लेकिन दिल्ली की जनता की कसौटियों पर समस्याओं का समाधान कर खड़ी उतरेंगी की नहीं, इसका जवाब भविष्य ही देगा।
अभी उनके सामने यमुना की सफाई, प्रदूषण, सफाई, स्वास्थ्य और शिक्षा पर समस्या का समाधान करने की प्राथमिकता होगा।
डॉ. बी. के. मल्लिक
वरिष्ठ स्तंभकार एवं लेखक


