“बिना कुर्सी के जनता का नेता: इंजीनियर मनोज झा बनाम सत्ता का किला”

“अगर इतना काम बिना सत्ता के कर सकते हैं, तो कुर्सी मिलने पर क्या नहीं करेंगे?”: जनता उवाच
सिकटी की राजनीति में विकल्प नहीं, विश्वास का नाम बनकर उभरे समाजसेवी इंजीनियर झा — जाति, मजहब से ऊपर उठकर सेवा से रच दी अलग पहचान
“बिना कुर्सी के जनता का नेता: इंजीनियर मनोज झा बनाम सत्ता का किला”
“अगर इतना काम बिना सत्ता के कर सकते हैं, तो कुर्सी मिलने पर क्या नहीं करेंगे?”: जनता उवाच
सिकटी की राजनीति में विकल्प नहीं, विश्वास का नाम बनकर उभरे समाजसेवी इंजीनियर झा — जाति, मजहब से ऊपर उठकर सेवा से रच दी अलग पहचान
सिकटी ।
बिहार की राजनीति में जब अधिकतर नेता प्रभाव के पीछे दौड़ रहे हैं, वहां सिकटी से एक ऐसा नाम उभर रहा है जो सेवा से सत्ता की राह बना रहा है — और वह नाम है इंजीनियर मनोज कुमार झा।
पिछले डेढ़ दशक से पटना से लेकर सिकटी तक बिना किसी पद या पावर के हजारों लोगों की मदद करने वाले इंजीनियर झा अब जनता की खुद की मांग बन गए हैं।
ना कोई पोस्ट, ना कोई प्रचार — फिर भी मनोज झा आज उस मुकाम पर हैं जहाँ लोग कहते हैं: “अगर इतना काम बिना सत्ता के कर सकते हैं, तो कुर्सी मिलने पर क्या नहीं करेंगे?”
पटना जैसे महंगे शहर में जरूरतमंदों के लिए रहने की मुफ्त व्यवस्था, मरीजों को हॉस्पिटल में डॉक्टर से मिलवाना, गरीबों के लिए आर्थिक मदद, और हर मजहब-जाति के लोगों को एक समान मानवता से देखना — यह सब अब उनकी दिनचर्या का हिस्सा है, और यही उन्हें बाकी नेताओं से अलग करता है।
जनता के बीच चर्चा: “हमारे पास काम करने वाला है, प्रचार करने वाला नहीं”
इंजीनियर मनोज झा न सिर्फ महागठबंधन के लिए पिछले एक दशक से एक वफादार सिपाही रहे हैं, बल्कि उनके समाजसेवा का असर इतना गहरा है कि उनका छोटा भाई भी अपने पंचायत में अल्पसंख्यक स्वजातीय होते हुए भारी मतों से पंचायत चुनाव जीतकर मिसाल कायम कर चुका है।
सिकटी विधानसभा, जो ढाई दशक से एनडीए का गढ़ बना हुआ है, वहां अब जनता बदलाव चाहती है — और बदलाव का चेहरा केवल “जनता के अपने मनोज झा” को मान रही है।
महागठबंधन की जरूरत, जनता की पसंद
आज की तारीख में महागठबंधन के पास सिकटी में ऐसा कोई दूसरा चेहरा नहीं है जो बीजेपी के मजबूत किले में सेंध लगा सके।
लेकिन मनोज झा, जिनका हर विचारधारा, हर समुदाय में स्वीकार्य चेहरा बन चुका है, वो इस चुनौती को जीत में बदलने की काबिलियत रखते हैं।
सभी घटक दलों की नजरें अब उन्हीं पर हैं।
कहा जा रहा है कि इस बार महागठबंधन समाजसेवी इंजीनियर मनोज झा पर दांव लगाएगा — और जनता बदलाव की मुहर लगाएगी।


