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भारतीय नृत्यों की विविधता के प्रचार पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

भारतीय नृत्यों की विविधता के प्रचार पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

लखनऊ: रमा ग्रामीण विकास संस्थान, देवरिया उत्तर प्रदेश के तत्वाधान में आयोजित तथा उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से भारत के विभिन्न प्रकार के नृत्यों की विविधता के प्रचार पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन मोहन सिंह बिष्ट सभागार, उत्तराखण्ड महापरिषद भवन, लखनऊ में आज दिनांक 27 फरवरी 2025 को आयोजित किया गया। जिसका उद्घाटन मुख्य अतिथि एडवोकेट विनय कुमार दुबे सदस्य हिंदी सलाहकार समिति गृह मंत्रालय भारत सरकार, दीवान सिंह अधिकारी अध्यक्ष श्री रामलीला समिति, नित्यानन्द शर्मा पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार, हरीश चन्द्र पंत अध्यक्ष, उत्तराखण्ड महापरिषद तथा वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रकिशोर शर्मा के कर कमलो द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन किया गया। इस अवसर पर पूरन चन्द्र जोशी सामाजिक कार्यकर्ता, सुरेश पाण्डेय, पंकज खर्कवाल, देवेष्वरी पवार एवं लोकगायिक हरितिमा पंत मौजूद रही। भारतीय नृत्यों की विविधता के प्रचार पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें भारत की सांस्कृतिक धरोहर अपने रंगारंग नृत्यों में झलकती है, जो देश की विविधता और एकता का प्रतीक है। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न प्रकार के भारतीय नृत्यों का प्रचार और संरक्षण करना है, जिससे लोग हमारी समृद्ध परंपराओं और लोक संस्कृति से परिचित हो सकें। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण में प्रस्तुतियाँ जिसमें गणेश वंदना एवं माॅ सरस्वती की स्तुति के साथ भारतीय लोक नृत्य कथक और भरतनाट्यम की भव्य प्रस्तुति। दूसरी प्रस्तुति में कामिनी एवं विशाल के निर्देशन में कृष्ण लीला पर आधारित राधा-कृष्ण मयूरी लोक नृत्य जो मोर पंख की सुंदरता और मयूरी के सौंदर्य को दर्शाने वाला विशेष लोकनृत्य की प्रस्तुति थी। तीसरी प्रस्तुति में पारम्परिक अवधी लोकनृत्य-जन्मे अवध में राम की सुन्दर प्रस्तुति और फागुनवा में रंग बरेसे पर अवधी लोक नृत्य अवध क्षेत्र की माटी की महक को संजोए इस नृत्य ने ग्रामीण जीवन की सरलता और उल्लास को दर्शाया। चौथी प्रस्तुति में राजस्थान की शान माने जाने वाले कालबेलिया नृत्य में कलाकारों ने साँप जैसी लचीली मुद्राओं के साथ अपनी कला का प्रदर्शन किया, जबकि घूमर नृत्य में रंग-बिरंगे घाघरों की घूमती छवि ने समां बाँध दिया। पाँचवी प्रस्तुति में उत्तराखण्ड के पारंपरिक लोक संगीत के साथ जीवंत नृत्य प्रस्तुति रंग-बिरंगी पोशाकों में सांस्कृतिक समृद्धि की झलक दर्शकों की तालियों के बीच नृत्य की ऊर्जा और उत्साह इन नृत्यों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता और उसकी जीवंत परंपराओं का सुंदर संगम देखने को मिला। संस्था के सचिव नित्यानन्द शर्मा ने कहा कि इन नृत्यों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता और उसकी जीवंत परंपराओं का सुंदर संगम देखने को मिला, जिसने सभी के हृदय में लोक कला के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना जगा दी। कलाकार- निर्देशन अंकिता बाजपेयी, हेमा बिष्ट, हरितिमा पंत, पृथ्वी, एड्री, शानवी, अरिका, यशि, काव्या, अमार्या, हर्ष, लवान्या, मानवी, कीर्ति, वर्धिका, मिष्का, मानसी राजपूत, शिवागी राजपूत, सानिया रावत, दिव्याशी पाण्डेय, साक्षी यादव, माडवी, मीनाक्षी, आयत, आराध्य वर्मा, शिवांगी सिंह, राधा, मयंक, पंकज साहू आदि साथी कलाकार थे। अंततः यह कार्यक्रम भारतीय नृत्य कला की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का एक सुंदर प्रतीक बनकर समाप्त हुआ, जो हमारी परंपराओं के संरक्षण और प्रसार की प्रेरणा देता है।

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