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राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव में दूसरे दिन दो नाटकों का मंचन।

मुंबई की नाटक टीम ने गंध के बहाने दिखाया यादों की स्मृतियां।

पश्मीना में दिखा कश्मीर का दर्द।

अशोक पासवान ब्यूरो आपकी आवाज।

स्मृतियां या गंध व्यक्ति के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नाटक की प्रस्तुति में आकाश गंगा ने सदैव जन समस्याओं को आगे रखा है। आकाश गंगा इस महोत्सव का आयोजन करते हुए रंगमंच को आम आवाम के लिए समर्पित कर रखा है। उक्त बातें आकाश गंगा रंग चौपाल एसोसिएशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्थानीय तेघड़ा विधायक राम रतन सिंह ने कहा। महोत्सव के दूसरे दिन कार्यक्रम का उदघाटन स्थानीय विधायक राम रतन सिंह, फिल्म अभिनेता संजय पांडेय, पूर्व विधान पार्षद भूमिपाल राय, उप मुख्य पार्षद ऋषिकेश कुमार, मनोज टाइगर, समाजसेवी प्रमोद कुमार सिंह एवं डॉ अमित रोशन के द्वारा किया गया। वहीं निर्देशक मनीष शिर्के ने गंध के बहाने उन हर पहलुओं को छूने की कोशिश की जो आज समाज के अंदर रिश्ते में दिख रहा है। गंध या दुर्गंध..अच्छा या बुरा… इस नाटक में गंध अच्छी या बुरी यादों का प्रतीक है दिखा।मुंबई की संस्था द्वारा नाटक गन्ध की प्रस्तुति की गयी। अगर यादें न हों तो जीवन जीना मुश्किल हो जाता है। कहानी एक पात्र की है जो अपने स्कूल के दिनों को याद कर रहा है। जिसमें स्कूल की पढ़ाई छूटने का दुख और स्कूल के दोस्त से मिलने की खुशी शामिल है। ये दोनों ही यादें स्कूल से जुड़ी हैं। सच्ची दोस्ती को बहुत सहजता से दिखाया गया है। वहीं दूसरी कहानी जीवन के संघर्ष के बारे में है। सब कुछ ठीक और अच्छा चल रहा होता है, लेकिन एक स्थिति आती है जब कुछ छूट जाने का एहसास होता है। वहीं तीसरी कहानी एक महिला के अकेलेपन की है, जो अपनी खोई यादों, अपनी गलतियों और विश्वासघात के अहसास की तलाश में है। मूलतः निर्देशक ने इन सभी यादों या गंध को दिखाने का काम किया है।नाटक में निर्देशक मनीष शिर्के ने अपने अभिनेता राम गंगवार, दीपा सिंह, रागिनी पांडेय से मंच पर खूब काम लिया। वहीं दूसरी नाटक की प्रस्तुति में आशीर्वाद रंगमंडल द्वारा डॉ. अमित रौशन निर्देशित नाटक पश्मीना का मंचन किया गया। नाटक पश्मीना कश्मीर की पृष्ठभूमि पर मानवीय रिश्तों के ताने-बाने को नाजुक धागे से जोड़ता दिखा। नाटक ये और वो की लड़ाई में एक कुशल कबूतरबाज की तरह मानवता की पतली रस्सी पर चलकर संतुलन बनाने की एक कोशिश करता दिखा। मृणाल माथुर लिखित नाटक पश्मीना, जो एक बहुत ही नाजुक धागों से बुना हुआ होता है। ठीक उसी प्रकार मानवीय संबंध भी बहुत ही नाजुक होता है। पश्मीना शॉल को प्रतीक बनाकर लेखक इंसानी संबंधों के मानवीय संवेदनाओं, संबंधों की जटिलता को दिखाते नजर आए। नाटक में अमर सक्सेना के किरदार को सचिन कुमार, विभा सक्सेना के रूप में कविता कुमारी ने सजीव अदाकारी की। वहीं सचिन कुमार डॉ. कौल, कुणाल भारती रविन्दर ढिल्लो एवं रितु कुमारी ने स्वीटी की जीवंत भूमिका अदी की। दुकानदार के रूप में अरूण कुमार, दुकानदार के बेटा के रूप में शुभम कुमार, वेटर की भूमिका में बिट्टू कुमार तथा फौजी के रूप में शुभम कुमार की अदाकारी को लोगों ने खूब सराहा। नाटक में सहयोगी के तौर पर संगीत पर अमन शर्मा, प्रकाश पर वरूण, मेकअप में सचिन कुमार, वस्त्र-विन्यास मोहित मोहन, रितु कुमारी, सेट निर्माण में विजय शर्मा, प्रोपर्टी कुणाल भारती, पंकज कुमार सिन्हा, धर्मेन्द्र कुमार, रिषभ कुमार, मोहित मोहन, आशीष कुमार, विष्णु कुमार, सेट डिजाइन वरिष्ठ चित्रकार सीताराम ने किया। वहीं इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष अमर ज्योति, सचिव गणेश गौरव, मनीष कुमार, अंकित कुमार, रूपेश कुमार, राधे कुमार, शिव कुमार, जितेंद्र कुमार, के द्वारा अतिथियों का सम्मान किया गया। संचालन एसोसिएशन के संयोजक डॉ कुंदन कुमार ने किया।वहीं इसके पूर्व कलाकार आनंद कुमार, बलिराम बिहारी, दिनेश दीवाना, संतोष कुमार, लालू बिहारी, राजू कुमार, अंजली कुमारी, निधि कुमारी सहित अन्य के द्वारा गीतों की प्रस्तुत की गयी। जबकि साक्षी कुमारी के निर्देशन में बच्चों ने सुंदर और मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का दिल जीत लिया।

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