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सोशल मीडिया पर रील बनाने वाले अपनी अहमियत,सुरक्षा के साथ साथ अश्लीलता को न परोसे: खुशबू कर्ण

सोशल मीडिया पर रील बनाने वाले अपनी अहमियत,सुरक्षा के साथ साथ अश्लीलता को न परोसे: खुशबू कर्ण
सोशल मीडिया खासकर फेसबुक और यूट्यूब पर रील बनाकर अपलोड कर हम अपना प्रचार ही नहीं अपने क्षेत्र के महत्त्वपूर्ण स्थानों मंदिरों सहित अपनी कला को स्थापित व मशहूर कर सकते है। लेकिन जिस तरह से आज इन सब जगहों पर जिस तरह से अश्लीलता फैल रही है इससे बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता ही है, युवा वर्ग भी भटक रहा है।
शिविपट्टी मधुबनी के नई दिल्ली में रहने बाली खुशबू कर्ण ने बताया कि आज प्रचार के इस महत्त्वपूर्ण भूमिका के साथ कुछ लोग न केवल अपने जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे है वही कम उम्र के बच्चों व युवाओं को अश्लीलता की ओर ले जा रही है जो उचित नहीं है। चलती ट्रेन, बाइक, रेल लाइन, नदी, समुद्र में जाकर रील बनाना खतरों का घर बनता जा रहा है। केंद्र सरकार इस दिशा में चुप बैठी है,जबकि संबंध में कठोर से कठोर कानून बनाना चाहिए। साथ ही इस कानून के पालन सख्ती से हो यह जिम्मेदारी रील बनाने वाले के ऊपर भी निर्भर होना चाहिए ।
खुशबू कर्ण के अनुसार सोशल मीडिया के माध्यम से हम जहां अपनी सभ्यता संस्कृति को जेहन में ले आते है वहीं हम अपने अगल बगल के प्राचीन काल के मंदिरों, स्कूल अन्य चीजों को पूरे विश्व मे पुनः स्थापित कर पाते है। सोशल मिडिया के सभी अंगों में सबसे अधिक लोकप्रियता आज रील के माध्यम से ही हम सबों को मिलती है। यही कारण है कि रील के माध्यम से सोशल मिडिया पर कई गुमनाम कलाकारों को जो इज्जत और हौसला अफजाई मिला है वह दुनिया के सामने है। परन्तु आज जिस तरह रील में अश्लीलता पड़ोसी जा रही उसे नहीं रोका गया तो आने वाले दिनों इसके भयंकर परिणाम आ सकते हैं।आज सोशल मीडिया पर हम सबको बस गुण दोष के आधार पर अपनी बाते रील के माध्यम से रखना चाहिए। साथ ही इसका भी ख्याल रहे की रील को लोकप्रियता बनाने में आज कम उम्र के युवा पीढ़ी की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

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