बिहार एवं झारखंड

रिश्तों की कड़वाहट के बीच मानवता की मिसाल: ‘आशांजलि’ बना बेसहारा बुजुर्गों का सहारा

–राजेश निगम
​इंदौर। क्या एक बीमारी रिश्तों पर इतनी भारी पड़ सकती है कि सगे संबंधी ही अपनों से मुंह मोड़ लें? 50 वर्षीय संजय भरिया की कहानी कुछ ऐसी ही हृदयविदारक सच्चाई बयां करती है। पिछले डेढ़ साल से पैरालिसिस (लकवा) से जूझ रहे संजय जी को उस वक्त सबसे गहरा सदमा लगा, जब उनके अपने बेटे ने ही उनकी देखभाल करने में असमर्थता जताते हुए उन्हें वृद्धाश्रम भेजने का आवेदन दे दिया। विडंबना देखिए कि माता-पिता के जीवित होने के बावजूद, बीमारी की हालत में उन्हें परिवार से बाहर कर दिया गया।
​हीरा नगर पुलिस और आशांजलि की मानवीय पहल
​जब हीरा नगर पुलिस स्टेशन के माध्यम से यह मामला सामने आया, तो ‘आशांजलि ओल्ड ऐज केयर होम’ ने बिना देर किए संजय जी को अपनी शरण में लिया। जहाँ अपनों ने साथ छोड़ दिया, वहां आशांजलि आश्रम ने एक परिवार की तरह उनके घावों पर मरहम लगाने का बीड़ा उठाया है।
​बिना सरकारी मदद के सेवा का संकल्प
​’आशांजलि आश्रम’ वर्तमान में करीब 55 ऐसे बुजुर्गों और शारीरिक-मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों की सेवा कर रहा है, जिन्हें उनके परिवारों ने त्याग दिया है। सबसे खास बात यह है कि यह संस्था बिना किसी शासकीय सहायता के, केवल दानदाताओं और समाज के सहयोग से पूर्णतः निःशुल्क संचालित की जा रही है।
​आपकी एक छोटी सी मदद बदल सकती है किसी का जीवन
​संस्था का मुख्य उद्देश्य समाज के उन बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन देना है जो निराश और असहाय हैं। यदि आपके आसपास भी कोई ऐसा बुजुर्ग है जिसे मदद की जरूरत है, या आप इस पुनीत कार्य में सहयोग करना चाहते हैं, तो इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं: 9111032866, 6375183361, 95891 09704
​”बुढ़ापा और बीमारी अभिशाप नहीं है, बल्कि अपनों का साथ छोड़ देना सबसे बड़ा दुख है। आशांजलि आश्रम इन्हीं टूटते रिश्तों के बीच सेवा की नई अलख जगा रहा है।”
राजेश निगम
(प्रदेश अध्यक्ष, मध्य प्रदेश)
भारतीय पत्रकार सुरक्षा परिषद

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