
संजीव मिश्रा की जनसंपर्क यात्रा से गरमाई राजनीति — “अब बर्दाश्त नहीं, बदलाव चाहिए!”
संजीव मिश्रा की जनसंपर्क यात्रा से गरमाई राजनीति — "अब बर्दाश्त नहीं, बदलाव चाहिए!"
छातापुर में बदलेगा सियासी मिजाज?
संजीव मिश्रा की जनसंपर्क यात्रा से गरमाई राजनीति — “अब बर्दाश्त नहीं, बदलाव चाहिए!”

लक्ष्मीपुर खूंटी की गलियों से उठी आवाज़ — हमें विकास चाहिए, वादे नहीं!
छातापुर (सुपौल) ।
छातापुर विधानसभा में इस बार सियासत की हवा कुछ अलग है — और इसकी सबसे बड़ी वजह हैं वीआईपी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पनोरमा ग्रुप के प्रबंध निदेशक श्री संजीव मिश्रा, जिन्होंने बुधवार को लक्ष्मीपुर खूंटी पंचायत में जोरदार जनसंपर्क अभियान चलाकर स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी।
गांव की गलियों में मिश्रा के स्वागत में उमड़ा जनसैलाब, और लोगों की आंखों में उम्मीद की चमक — ये संकेत है कि छातापुर अब बदलाव के लिए तैयार बैठा है।
“अब वक़्त है कि छातापुर बोले — काफी हुआ!” – संजीव मिश्रा
जन संवाद के दौरान मिश्रा ने खुलकर कहा:
> “सरकारें आती गईं, लेकिन छातापुर वहीं का वहीं है। अब जनता को सिर्फ वोट नहीं डालना, बल्कि सोच-समझकर विकल्प चुनना होगा — जो जमीन पर दिखे, वहीं असली नेता है।”
जनता के सवाल और संजीव मिश्रा के जवाब
गांव के एक-एक वार्ड में घूमकर मिश्रा ने लोगों से संवाद किया। ग्रामीणों ने ये प्रमुख समस्याएं गिनाईं:
बिजली कटौती और ट्रांसफॉर्मर की समस्या
बदहाल सड़कें और गड्ढों में तब्दील संपर्क मार्ग
स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी
स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर और दवाइयों की अनुपलब्धता
युवाओं के लिए रोज़गार का अभाव और लगातार पलायन
मिश्रा ने वादा किया कि यदि जनता उन्हें अवसर देती है तो वह छातापुर को “सर्वसुविधायुक्त विधानसभा क्षेत्र” में बदलकर दिखाएंगे।
युवा शक्ति को किया संबोधित — “बदलाव की मशाल तुम उठाओ!”
उन्होंने युवाओं से आवाहन किया:
> “छातापुर का भविष्य आपके हाथ में है। जगरूक बनिए, संगठित होइए और जनहित की इस लड़ाई में भाग लीजिए।”
भीड़ ने दिया संकेत — मिश्रा को मिल रहा है ज़मीनी समर्थन
जनसंपर्क के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, युवा वर्ग और किसानों की बड़ी संख्या में भागीदारी देखी गई।
ग्रामीणों ने कहा:
> “बाकी लोग चुनाव के समय आते हैं, ये नेता तो हमारे साथ चल रहा है — हमारे घर तक आ रहा है। यही चाहिए हमें!”
संजीव मिश्रा की यह सक्रियता सिर्फ प्रचार नहीं, एक संगठित रणनीति का हिस्सा लग रही है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि “छातापुर की चुनावी तस्वीर में ये सबसे गंभीर और ज़मीनी चुनौती बनकर उभर रहे हैं।”
संजीव मिश्रा का छातापुर दौरा सिर्फ जनसंपर्क नहीं था — यह जनता से सीधा जुड़ाव और राजनीतिक विकल्प के तौर पर खुद को प्रस्तुत करने की एक निर्णायक पहल थी।
छातापुर की जनता अब विकल्प तलाश रही है — और मिश्रा का अभियान उसी विकल्प की एक आवाज बनता दिख रहा है।


