
सुरक्षित तैराकी मिशन 2025: डूबने से नहीं, बचाव से जीतेगा अररिया!
सुरक्षित तैराकी मिशन 2025: डूबने से नहीं, बचाव से जीतेगा अररिया!
सुरक्षित तैराकी मिशन 2025: डूबने से नहीं, बचाव से जीतेगा अररिया!

माननीय मंत्री श्री विजय कुमार मंडल और जिलाधिकारी श्री अनिल कुमार ने किया 12 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन
1680 बच्चों को मिलेगा जीवनरक्षक प्रशिक्षण
अररिया
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वावधान में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, अररिया द्वारा जिले के चार प्रमुख बाढ़ प्रभावित प्रखंडों—सिकटी, पलासी, कुर्साकांटा और फारबिसगंज—में “सुरक्षित तैराकी प्रशिक्षण कार्यक्रम” का भव्य शुभारंभ आज सिकटी प्रखंड कार्यालय परिसर में किया गया।
इस अवसर पर बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री श्री विजय कुमार मंडल एवं जिलाधिकारी श्री अनिल कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
*कार्यक्रम का उद्देश्य*
“तैरना सिखिए, जीवन बचाइए।”
यह कार्यक्रम जल-आधारित आपदाओं के प्रति बच्चों एवं युवाओं को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम कदम है।
*प्रशिक्षण की विशेषताएं*
आयु समूह: 06–18 वर्ष के बच्चे
प्रशिक्षण की अवधि: 12 दिन
प्रत्येक बैच: 35 बच्चे
दैनिक बैच: 2 (प्रातः और अपराह्न)
प्रशिक्षकों की नियुक्ति: मास्टर ट्रेनर द्वारा प्राधिकरण स्तर से
कुल लक्ष्य: 1680 बच्चे
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*प्रमुख तथ्य एक नजर में*
प्रखंड प्रशिक्षण स्थल बच्चों की संख्या
सिकटी सार्वजनिक जलस्रोत 420
पलासी सार्वजनिक जलस्रोत 420
कुर्साकांटा सार्वजनिक जलस्रोत 420
फारबिसगंज सार्वजनिक जलस्रोत 420
*प्रशासनिक वक्तव्य*
आपदा प्रबंधन मंत्री श्री विजय कुमार मंडल ने कहा कि “सुरक्षित तैराकी केवल एक प्रशिक्षण नहीं, यह जीवनरक्षा का विज्ञान है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को आपदा के समय खुद को और दूसरों को बचाने की शक्ति देगी।”
जिलाधिकारी श्री अनिल कुमार ने कहा कि “विगत वर्षों में जलस्रोतों में डूबने से हुई मौतों ने यह सिद्ध किया है कि तैराकी एक अनिवार्य जीवन कौशल है। यह प्रशिक्षण बच्चों को आत्मनिर्भर और सतर्क बनाएगा।”
*आपदा प्रबंधन की तैयारी*
✔ एस डी आर एफ की तैनाती: फारबिसगंज, सिकटी और जिला मुख्यालय में
✔ 240 आपदा मित्र: विशेष खोज एवं बचाव कार्य के लिए प्रशिक्षित
✔ जन जागरूकता अभियान: जिला व अंचल स्तर पर
✔ क्या करें, क्या न करें: हर कार्यक्रम में निर्देशात्मक मॉड्यूल
*कार्यक्रम का समापन: रेस्क्यू डेमो और बच्चों की सहभागिता*
समारोह के अंत में प्रशिक्षकों द्वारा जीवनरक्षक उपायों का प्रदर्शन किया गया और बच्चों को जल-आपदा में आत्म-सुरक्षा के उपाय सिखाए गए।
*संदेश जनमानस के लिए:*
“बाढ़ से पहले सीखें तैरना, जान है तो जहान है!”
“आपदा में सहारा बनें, समर्थ नागरिक बनें!”
सम्पूर्ण जिले में पहली बार इतने बड़े स्तर पर सामूहिक जल-सुरक्षा अभियान किया जा रहा है।यह कार्यक्रम ना केवल बच्चों को जल-आधारित आपदाओं से लड़ने के लिए तैयार करेगा, बल्कि समाज को जागरूकता की एक नई लहर भी देगा। इसके माध्यम से अररिया जिला एक मॉडल बाढ़-सुरक्षित जिला बनने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।


