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आधा फूल” पहल में अररिया की पूजा कुमारी और नुपूर चक्रवर्ती को उत्कृष्ट शिक्षिका सम्मान

आधा फूल” पहल में अररिया की पूजा कुमारी और नुपूर चक्रवर्ती को उत्कृष्ट शिक्षिका सम्मान

आधा फूल” पहल में अररिया की पूजा कुमारी और नुपूर चक्रवर्ती को उत्कृष्ट शिक्षिका सम्मान


किशोर छात्रों में आत्म-सम्मान और जीवन कौशल विकसित करने वाली राज्यस्तरीय मुहिम में अररिया का जलवा, अब 9वीं से 12वीं तक पहुंचेगी पहल

पटना/अररिया।

किशोरावस्था के बच्चों के मन में आने वाले भटकाव को रोकना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए उन्हें तैयार करना — इन्हीं उद्देश्यों के साथ चल रही अनोखी पहल “आधा फूल” में अररिया जिले ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। इस पहल में उल्लेखनीय योगदान के लिए जिले की दो शिक्षिकाओं — ऊ.म.वि. जितवारपुर की पूजा कुमारी और ऊ.म.वि. चण्डीपुर की नुपूर चक्रवर्ती — को उत्कृष्ट शिक्षिका सम्मान से नवाजा गया।

यह सम्मान पटना के होटल चाणक्य में आयोजित दो दिवसीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया गया। इस प्रशिक्षण में अररिया जिले से चार शिक्षक-शिक्षिकाओं — राकेश कुमार, पूजा कुमारी, सुजीत कुमार और नुपूर चक्रवर्ती — ने हिस्सा लिया और मास्टर ट्रेनर के रूप में चयनित हुए।

कार्यक्रम का उद्देश्य और खासियत

“आधा फूल” पहल किशोर छात्रों के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास के लिए शुरू की गई है। पहले यह 6वीं से 8वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के बीच चलती थी, लेकिन अब इसे 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों में भी लागू किया जाएगा।

इस कार्यक्रम की एक बड़ी खासियत है कि इसके तहत कॉमिक बुक के माध्यम से संदेश दिए जाते हैं। रंग-बिरंगे चित्रों और रोचक कहानियों से जुड़ी यह किताब किशोर छात्रों को आसानी से जोड़ती है, उन्हें भटकाव से रोकने के साथ-साथ सकारात्मक सोच और आत्म-सम्मान विकसित करने में मदद करती है।

प्रशिक्षण में क्या सिखाया गया

मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने किशोरावस्था में आने वाले मनोवैज्ञानिक बदलाव, भावनात्मक प्रबंधन, आत्म-सम्मान बढ़ाने की तकनीकें और जीवन कौशल विकसित करने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। मास्टर ट्रेनर विप्लव कुमार ने बताया कि “एडोलसेंट एज में सही मार्गदर्शन और सकारात्मक माहौल बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाता है।”

आगे की योजना

अब जिला स्तर पर योजना है कि जिले के सभी मध्य एवं उच्च विद्यालयों से एक-एक शिक्षक/शिक्षिका को प्रशिक्षित किया जाए। यह प्रशिक्षण अलग-अलग चरणों में आयोजित होगा, ताकि इस पहल का लाभ अधिक से अधिक छात्रों तक पहुंच सके।

शिक्षा विभाग का मानना है कि इस प्रयास से न केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई में सुधार होगा, बल्कि उनके सामाजिक और भावनात्मक विकास में भी उल्लेखनीय प्रगति होगी।

राज्यस्तरीय मंच पर जब पूजा कुमारी और नुपूर चक्रवर्ती के नाम की घोषणा हुई, तो यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि पूरे अररिया जिले की पहचान और गौरव का क्षण बन गया। “आधा फूल” की खुशबू अब जिले से निकलकर पूरे बिहार में फैलने को तैयार है।

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