
रियल एस्टेट कानून की साप्ताहिक विशेष श्रृंखला

रेरा (RERA) दृष्टि – प्रथम किस्त
भूमिका
भारत में घर खरीदना केवल पैसे खर्च करने का मामला नहीं होता, बल्कि यह हर परिवार के जीवन का एक महत्वपूर्ण सपना होता है।एक घर मतलब—अपना सुरक्षित स्थान, बच्चों का भविष्य, जीवन भर की मेहनत की कमाई और अपने बुज़ुर्गों को स्थिरता देने का भरोसा। हर व्यक्ति चाहता है कि उसका परिवार एक ऐसी छत के नीचे रहे जहाँ सुरक्षा हो, स्थिरता हो और जीवन आगे बढ़ने का आधार मिल सके।
लेकिन लंबे समय तक घर खरीदना लोगों के लिए बहुत कठिन और जोखिम भरा काम रहा। किसी ने 10–15 साल बचत की, बैंक से लोन लिया, EMI भरना शुरू किया—पर घर मिला ही नहीं। कई मामलों में तो बिल्डर प्रोजेक्ट अधूरा छोड़कर चले गए, जिससे खरीदार का सपना अधर में लटक गया।कई परिवारों को ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ा कि घर समय पर नहीं मिला, जबकि भुगतान पूरा या लगभग पूरा दे दिया गया था।
इसी व्यापक समस्या का समाधान है— रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA)। जो 1 मई 2017 से पूरे देश में लागू हुआ।
क्यों ज़रूरी था रेरा (RERA)? — आम खरीदार की सुरक्षा का आधार
भारत का रियल एस्टेट सेक्टर कई वर्षों तक बिना किसी सख़्त कानून और पारदर्शी व्यवस्था के चलता रहा। इस कारण घर खरीदना आम लोगों के लिए लगातार जोखिम भरा और मानसिक तनाव से भरा अनुभव बन गया था। एक तरफ़ बिल्डरों की मनमानी, दूसरी तरफ़ अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स, और तीसरी तरफ़ खरीदार के पास अपनी शिकायत उठाने के लिए कोई प्रभावी मंच — इसी वातावरण में यह ज़रूरत सामने आई कि एक ऐसा कानून बनाया जाए जो बिल्डरों को जिम्मेदार बनाए, निर्माण क्षेत्र में पारदर्शिता लाए, खरीदार के पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित करे और किसी भी तरह की धोखाधड़ी पर तुरंत कार्रवाई की सुविधा दे। एक ऐसा कानून जिसकी नज़र हर प्रोजेक्ट पर हो और जो बिल्डर व खरीदार—दोनों के अधिकार और ज़िम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से तय करे। इन्हीं वजहों से केंद्र सरकार ने रियल एस्टेट क्षेत्र को पूरी तरह से व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से रेरा (RERA) —Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 का निर्माण किया। यह कानून घर खरीदने वालों को पहली बार कानूनी सुरक्षा, स्पष्टता और विश्वास देने के लिए बनाया गया। सरल शब्दों में कहा जाए तो, देश में रियल एस्टेट में फैले अव्यवस्था और अनिश्चितता को खत्म करने, और आम लोगों को उनके सपनों का घर सुरक्षित रूप से दिलाने की सोच से ही रेरा का जन्म हुआ, ताकि घर खरीदने वाले को न केवल सुरक्षा मिले, बल्कि पूरा सिस्टम जवाबदेह बने और कोई भी खरीदार अब “निराशा का शिकार”न हो।
सबसे पहले, बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगाना जरूरी था। बिल्डर अक्सर नक्शे बदल देते थे, सुविधाओं का वादा पूरा नहीं करते थे, या कब्ज़ा देने में वर्षों का समय लगा देते थे। खरीदार EMI भरता रहता, लेकिन घर नहीं मिलता और कोई सुनवाई भी नहीं होती। RERA ने इस मनमानी पर कानूनी लगाम लगाते हुए बिल्डरों को उनके हर वादे के लिए ज़िम्मेदार बनाया।
दूसरी बड़ी समस्या थी प्रोजेक्ट्स का अधूरा छोड़ दिया जाना। देशभर में लाखों परिवार ऐसे थे जो EMI और किराए दोनों का बोझ उठाते रहे, क्योंकि उनका घर समय पर पूरा ही नहीं हुआ। रेरा ने प्रोजेक्ट टाइमलाइन को कानून से जोड़कर यह सुनिश्चित किया कि निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा हो या देरी होने पर खरीदार को क्षतिपूर्ति मिले।
तीसरा बड़ा मुद्दा था पारदर्शिता की कमी। पहले मंज़ूरियों की जानकारी, निर्माण की प्रगति, फंड के उपयोग, और प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति जैसे महत्वपूर्ण तथ्य खरीदारों से छिपे रहते थे। रेरा (RERA) यह अनिवार्य किया कि सभी प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारियाँ अब सार्वजनिक पोर्टल पर दर्ज हों, ताकि खरीदार हर चरण की वास्तविक स्थिति देख सके।
अंत में, खरीदार के पास पहले लगभग कोई अधिकार या प्लेटफॉर्म नहीं था जहाँ वह अपनी शिकायत दर्ज कर सके और जल्दी समाधान पा सके। RERA ने पहली बार आम खरीदार को कानूनी शक्ति और न्याय का एक तेज़, प्रभावी मंच उपलब्ध कराया, जहाँ उसके अधिकारों की रक्षा की जाती है।
इस प्रकार, रेरा (RERA) सिर्फ़ एक कानून नहीं, बल्कि घर खरीदने वाले प्रत्येक परिवार की सुरक्षा, उम्मीद और विश्वास को मजबूत करने वाली एक ऐतिहासिक पहल है।
रेरा (RERA) की मुख्य विशेषताएँ: आम लोगों की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार
रेरा (RERA) को समझने का आसान तरीका यह है कि यह कानून घर खरीदने वाले को हर उस समस्या से बचाता है, जिसका सामना पहले लोग सालों तक करते रहे—जैसे देरी, धोखाधड़ी, गलत जानकारी और पैसों का नुकसान। रेरा (RERA) ने रियल एस्टेट को पहली बार पारदर्शी, जवाबदेह और खरीदार-हितैषी बनाया है।
सबसे पहले, प्रोजेक्ट का RERA में पंजीकरण अब अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मतलब है कि कोई भी बिल्डर तब तक घर बेच नहीं सकता जब तक उसका प्रोजेक्ट रेरा (RERA) में रजिस्टर्ड न हो। इससे खरीदार को यह भरोसा मिल जाता है कि प्रोजेक्ट असली है, सभी मंजूरियाँ ली जा चुकी हैं और कोई भी जानकारी छिपाई नहीं गई है। यह खरीदार की सुरक्षा का है।
पहला और सबसे मजबूत कदम है।
दूसरा बड़ा बदलाव है खरीदार के पैसों की सुरक्षा। पहली बार कानून ने स्पष्ट किया कि बिल्डर खरीदार से मिला 70% पैसा एक अलग बैंक खाते में ही रखेगा। यह पैसा सिर्फ उसी प्रोजेक्ट पर खर्च किया जा सकता है। इससे यह खतरा लगभग खत्म हो गया कि बिल्डर किसी और प्रोजेक्ट में पैसा लगा दे या निर्माण रुक जाए। इस नियम ने प्रोजेक्ट के समय पर पूरा होने की संभावना भी बहुत बढ़ा दी है।
तीसरी महत्वपूर्ण विशेषता है— समय पर घर देने की कानूनी बाध्यता। पहले कब्ज़ा मिलने में देरी आम बात थी, लेकिन अब यदि बिल्डर तय समय पर घर पूरा नहीं करता, तो उसे खरीदार को ब्याज देना होगा या खरीदार की पूरी रकम वापस करनी पड़ेगी। यह नियम खरीदार को न सिर्फ आर्थिक बल्कि मानसिक और भावनात्मक राहत भी देता है।
चौथी सुविधा है— झूठे वादों और भ्रामक विज्ञापनों पर सख्त रोक। अब बिल्डर कोई भी दावा—जैसे अतिरिक्त सुविधाएँ, क्लब हाउस, एक्स्ट्रा स्पेस—बिना आधार के नहीं कर सकता। गलत विज्ञापन या अधूरे वादों पर भारी पेनल्टी और कानूनी कार्रवाई होती है। इससे निर्माण क्षेत्र में ईमानदारी और स्पष्टता बढ़ी है।
पाँचवीं बड़ी सुविधा है —आसान और तेज़ शिकायत समाधान। रेरा (RERA) ने हर राज्य में अलग प्राधिकरण बनाया है जहाँ खरीदार ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकता है। सुनवाई समय पर होती है और निर्णय भी जल्दी दिए जाते हैं। अब खरीदार को वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने की ज़रूरत नहीं होती।
छठी और सबसे उल्लेखनीय विशेषता है— पूर्ण पारदर्शिता। खरीदार रेरा (RERA) की वेबसाइट पर अपने घर से जुड़े लगभग हर महत्वपूर्ण तथ्य देख सकता है—जैसे प्रोजेक्ट की मंजूरियाँ, निर्माण की प्रगति, बिल्डर का रिकॉर्ड, वास्तविक कीमत और कब्ज़ा देने की समयसीमा। यह जानकारी पहले कभी इतनी खुलकर उपलब्ध नहीं होती थी।
इन सभी विशेषताओं ने मिलकर घर खरीदने की प्रक्रिया को न सिर्फ सुरक्षित बनाया है, बल्कि भरोसे और स्पष्टता पर आधारित भी किया है। एक तरह से कहा जाए तो, रेरा (RERA) सिर्फ एक कानून नहीं—बल्कि घर खरीदने वालों के लिए एक सुरक्षा कवच है।
रेरा (RERA) ने घर खरीदने को सचमुच सुरक्षित बनाया
रेरा (RERA) आज भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में सबसे बड़ा और सबसे प्रभावी सुधार माना जाता है। इस कानून ने घर खरीदने की प्रक्रिया को उस डर, अनिश्चितता और जोखिम से बाहर निकाला है, जिसके कारण लाखों परिवार वर्षों से परेशान होते आ रहे थे। पहले खरीदार को न प्रोजेक्ट की सही जानकारी मिलती थी, न समय पर घर मिलता था, और न ही किसी गलत व्यवहार या धोखे के खिलाफ उसके पास कोई सशक्त कानूनी साधन था। लेकिन RERA ने इस पूरे परिदृश्य को बदल दिया है। अब हर प्रोजेक्ट पारदर्शी तरीके से काम करता है, खरीदार को सभी तथ्य ऑनलाइन देखने मिलते हैं, पैसे की सुरक्षा का प्रावधान है, और बिल्डर को हर वादे और समयसीमा का पालन करना अनिवार्य है। सबसे बड़ी बात—यदि कोई समस्या आती भी है, तो खरीदार के पास एक मजबूत मंच है जहाँ उसे तेज़ और न्यायपूर्ण समाधान मिल सकता है।
इस बदलाव ने रियल एस्टेट बाजार में विश्वास, स्पष्टता, और व्यवस्था को पुनः स्थापित किया है। आज घर खरीदना केवल एक सौदा नहीं रहा, बल्कि एक सुरक्षित, नियमबद्ध और भरोसेमंद प्रक्रिया बन गया है।
साधारण शब्दों में कहा जाए तो— RERA ने भारतीय रियल एस्टेट में “सपनों को सुरक्षा” और “निवेश को विश्वास” दिया है। यही इसकी सबसे बड़ी सफलता है।
इस साप्ताहिक श्रृंखला की प्रथम किस्त यहीं समाप्त होती है। अगली किस्त में कानून की एक और महत्वपूर्ण परत खोलेंगे।
आपका साथी,
वी. शौकीन
कंपनी सचिव एवं रेरा सलाहकार
9811937212



