
नववर्ष 2026: ‘विकसित भारत @2047’ की ओर—संकल्प, स्वास्थ्य और समग्र राष्ट्र निर्माण का साझा मार्ग
नववर्ष 2026: ‘विकसित भारत @2047’ की ओर—संकल्प, स्वास्थ्य और समग्र राष्ट्र निर्माण का साझा मार्ग
नववर्ष 2026: ‘विकसित भारत @2047’ की ओर—संकल्प, स्वास्थ्य और समग्र राष्ट्र निर्माण का साझा मार्ग
नववर्ष 2026 की सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ।

यह नया वर्ष आपके जीवन में स्वास्थ्य, शांति, सकारात्मक ऊर्जा और निरंतर प्रगति लेकर आए। यह वर्ष केवल व्यक्तिगत सफलताओं का नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयासों से राष्ट्र को सशक्त बनाने का वर्ष बने—इसी मंगलकामना के साथ नववर्ष का अभिनंदन।
नववर्ष केवल तारीख़ का बदलाव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्म-सुधार और समाज व राष्ट्र के प्रति अपनी भूमिका को पुनः समझने का अवसर होता है। 01 जनवरी 2026 का यह दिन ऐसे समय आया है, जब भारत ‘विकसित भारत @2047’ के दीर्घकालिक लक्ष्य की ओर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में सरकार की नीतियों के साथ-साथ हर नागरिक का आचरण, स्वास्थ्य, सोच और योगदान समान रूप से महत्वपूर्ण है।
नववर्ष पर संकल्प लेना हमारी परंपरा है, पर 2026 की आवश्यकता है कि संकल्प केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित न रहें। आज का भारत ऐसे नागरिक चाहता है जो अपने कर्तव्यों, अधिकारों और सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग हों। हर व्यक्ति—चाहे वह छात्र हो, कर्मचारी हो, उद्यमी हो या गृहिणी—को स्वयं से पूछना चाहिए: क्या मेरा जीवन अनुशासन और संतुलन का उदाहरण है? क्या मेरे निर्णय समाज और राष्ट्र के हित में हैं? क्या मैं आने वाली पीढ़ी के लिए सही मूल्य छोड़ रहा हूँ? विकसित भारत का निर्माण जागरूक नागरिकों से ही संभव है। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण अनिवार्य है। तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सेवाएँ और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस युग में सीखना जीवनभर की प्रक्रिया बन चुका है।
नववर्ष 2026 के लिए सामूहिक संकल्प होने चाहिए: छात्रों के लिए मजबूत आधार और चरित्र निर्माण, युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी शिक्षा, पेशेवरों के लिए निरंतर अप-स्किलिंग और नैतिक कार्यसंस्कृति और उद्यमियों के लिए नवाचार, आत्मनिर्भरता और जिम्मेदार जोखिम।
अक्सर हम विकास को केवल आर्थिक आँकड़ों में मापते हैं, जबकि वास्तविक विकास स्वस्थ नागरिकों से होता है। शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और भावनात्मक स्थिरता—तीनों विकसित भारत की मौन शक्ति हैं।
नववर्ष 2026 में आवश्यक है: नियमित व्यायाम, योग, खेल और संतुलित आहार, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और तनाव प्रबंधन और कार्य-जीवन संतुलन और आत्म-देखभाल की संस्कृति । एक स्वस्थ नागरिक ही एक उत्पादक कर्मचारी, संवेदनशील माता-पिता और जिम्मेदार समाजसेवी बन सकता है।
विकसित भारत की परिकल्पना महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना अधूरी है। सुरक्षित कार्यस्थल, सम्मान, समान अवसर और पारिवारिक सहयोग—ये सभी सामाजिक प्रगति के आवश्यक स्तंभ हैं। मजबूत परिवार व्यवस्था, संस्कार और आपसी सम्मान समाज को स्थिरता प्रदान करते हैं, जो किसी भी राष्ट्र की दीर्घकालिक शक्ति होती है।
देश की वैश्विक छवि केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि संस्थागत विश्वास और नैतिक आचरण से बनती है। ईमानदारी, समयपालन, नियमों का पालन और पारदर्शिता हर क्षेत्र में आवश्यक हैं। नववर्ष संकल्पों में शामिल होना चाहिए: कानून और प्रक्रियाओं का सम्मान, भ्रष्टाचार और शॉर्टकट से दूरी और सार्वजनिक और निजी संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग।
भारत की युवा आबादी उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। यदि युवा वर्ग स्वास्थ्य, कौशल और चरित्र—तीनों पर समान ध्यान दे, तो 2047 का भारत स्वाभाविक रूप से विकसित होगा। युवाओं के लिए संदेश स्पष्ट है: त्वरित सफलता नहीं, स्थायी उत्कृष्टता, प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग और करियर के साथ राष्ट्र के प्रति संवेदनशीलता ।
विकसित भारत का अर्थ केवल ऊँची इमारतें नहीं, बल्कि स्वच्छ पर्यावरण, हरित ऊर्जा और टिकाऊ विकास भी है। जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। राष्ट्र निर्माण बड़े भाषणों से नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के छोटे-छोटे ईमानदार प्रयासों से होता है—समय पर काम, गुणवत्ता पर ध्यान, स्वच्छता, अनुशासन, करुणा और आत्म-देखभाल। नववर्ष 2026 हमें यह स्मरण कराता है कि विकसित भारत कोई दूर का सपना नहीं, बल्कि आज के निर्णयों का परिणाम है। जब हर नागरिक अपने जीवन में संतुलन, ईमानदारी, स्वास्थ्य और जिम्मेदारी को अपनाता है, तब राष्ट्र स्वतः सशक्त होता है।
नववर्ष 2026 की पुनः हार्दिक शुभकामनाएँ।
यह वर्ष आपके जीवन में उत्तम स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच, व्यावसायिक प्रगति और सामाजिक सौहार्द लेकर आए। आइए संकल्प लें—हम बेहतर व्यक्ति बनेंगे, स्वस्थ जीवन अपनाएँगे और ‘विकसित भारत @2047’ के निर्माण में पूरी निष्ठा से सहभागी बनेंगे।
लेखक:
विशम्बर शौकीन
कंपनी सचिव एवं रेरा सलाहकार



