
के. पी. कॉलेज मुरलीगंज में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आगाज, वैज्ञानिक नवाचारों पर वैश्विक मंथन
के. पी. कॉलेज मुरलीगंज में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आगाज, वैज्ञानिक नवाचारों पर वैश्विक मंथन
के. पी. कॉलेज मुरलीगंज में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आगाज, वैज्ञानिक नवाचारों पर वैश्विक मंथन

क्वांटम कंप्यूटर से ग्रीन नैनोमैटेरियल तक शोध की गूंज — देश-विदेश के वैज्ञानिकों ने साझा किए भविष्य के वैज्ञानिक रुझान
मुरलीगंज (मधेपुरा)।
के. पी. कॉलेज, मुरलीगंज में “रासायनिक विज्ञान, सतत विकास और वैश्विक नवाचारों में भविष्य के रुझान” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का गुरुवार को भव्य उद्घाटन हुआ। 6–7 फरवरी 2026 तक चलने वाली इस संगोष्ठी का उद्देश्य रासायनिक विज्ञान में हो रहे नवीन अनुसंधानों, सतत विकास और वैश्विक नवाचारों पर सार्थक विमर्श को बढ़ावा देना है। उद्घाटन सत्र में देश-विदेश से आए प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शिक्षकों और शोधार्थियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को अकादमिक गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम की शुरुआत संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. श्यामा कुमार भारती और डॉ. मोनी जोशी के निर्देशन में छात्राओं द्वारा प्रस्तुत कुलगीत से हुई, जिसने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। इसके बाद आयोजन
अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर संगोष्ठी का औपचारिक शुभारंभ किया। स्वागत गीत के पश्चात अतिथियों को पुस्तक, शॉल और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।
संगोष्ठी के संयोजक एवं महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अशोक कुमार झा ने स्वागत भाषण में कहा कि ऐसे अंतर्राष्ट्रीय आयोजन विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह मंच नए विचारों के आदान-प्रदान और शोध सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मंच संचालन डॉ. ऊषा शर्मा, डॉ. अभिजीत कुमार और डॉ. गरिमा त्रिपाठी ने कुशलतापूर्वक किया।
उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञ वक्ताओं ने आधुनिक विज्ञान के विविध आयामों पर प्रकाश डाला। इंडियन केमिकल सोसायटी, कोलकाता के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डी. सी. मुखर्जी ने स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों के माध्यम से छात्रों को प्रेरित करते हुए विज्ञान और नैतिक मूल्यों के समन्वय पर जोर दिया। जापान की तोहकू यूनिवर्सिटी से प्रो. मासाहिरो यमाशिता ने Molecular Spin Qubits पर अपने शोध निष्कर्ष साझा करते हुए क्वांटम कंप्यूटर और हाई-डेंसिटी मेमोरी डिवाइस के भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित किया।
सऊदी अरब से डॉ. विमल कृष्णा बैनिक ने जल माध्यम में जैविक रूप से सक्रिय यौगिकों के संश्लेषण और हरित रसायन के औषधीय उपयोग पर विस्तार से चर्चा की। आईआईटी कानपुर के डॉ. गुरुनाथ रामनाथन ने कार्बनिक प्रदूषकों को कम हानिकारक पदार्थों में बदलने की तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
आईआईटी खड़गपुर के डॉ. प्रणेश चौधरी ने Dual-phase photochromism पर अपने विचार रखे, जबकि विश्व भारती विश्वविद्यालय के डॉ. भाबातोष मंडल ने उन्नत पृथक्करण तकनीकों और एंजाइम संश्लेषण पर जानकारी दी। शारदा विश्वविद्यालय के प्रो. एन. बी. सिंह ने ग्रीन नैनोमैटेरियल और उनके सतत अनुप्रयोगों पर चर्चा करते हुए बताया कि नैनो तकनीक विश्व स्तर पर क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है। वहीं पंडित रवि शंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के डॉ. कल्लोल कुमार घोष ने स्मार्ट नैनोसेंसर और जल शुद्धिकरण में उनके उपयोग पर वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया।
ओरल प्रेजेंटेशन सत्र की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) नरेश कुमार, बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा ने की, जहां शोध छात्रों ने पोस्टर प्रेजेंटेशन के माध्यम से अपने शोध कार्यों को प्रदर्शित किया।
मौके पर महाविद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य सह हरिहर साहा कॉलेज उदाकिशुनगंज के यशस्वी प्रधानाचार्य डॉ.जवाहर पासवान भी सेमिनार में शिरकत किए I
उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने शैक्षणिक माहौल में सांस्कृतिक रंग भरते हुए उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।
इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में बड़ी संख्या में शिक्षक, वैज्ञानिक और शोध छात्र शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार यह आयोजन रासायनिक विज्ञान के क्षेत्र में सतत विकास और नवाचार को नई दिशा देने के साथ भविष्य के शोध के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा। दूसरे दिन भी देश-विदेश के विद्वानों के महत्वपूर्ण व्याख्यान प्रस्तावित हैं।
ज्ञान, शोध और नवाचार का यह संगम न केवल विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक साबित हो रहा है, बल्कि मुरलीगंज को वैश्विक शैक्षणिक मानचित्र पर भी मजबूती से स्थापित कर रहा है।
