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नेता जी अखण्ड भारत के सर्वश्रेष्ठ भाव युक्त समर्पित और साधक स्वरूप सबों के हृदय में रहने और सबों को समझने वाले युग पुरुष थे, जो अभी भी हैं। उनकी धारणा, उनका भाव, समर्पण को संक्षेप में हम समझने का प्रयास करते हैं।

*नेताजी सुभाचाचन्द्र बोस जी के भाव


नेता जी अखण्ड भारत के सर्वश्रेष्ठ भाव युक्त समर्पित और साधक स्वरूप सबों के हृदय में रहने और सबों को समझने वाले युग पुरुष थे, जो अभी भी हैं। उनकी धारणा, उनका भाव, समर्पण को संक्षेप में हम समझने का प्रयास करते हैं।


सुभाष चंद्र बोस जी के भाव
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बापू का सपना, साकार करेगे,
दुश्मन को अपने से दमन करेंगे।

पूज्य बापू धारक थे, आखंडता के,
चल पड़े सुभाष फिर आगे, उन्हें बता के।

जापान में निज सेना का ग्राफ बनाया,
भारत को आजादी का राह दिखाया।
पर विधि ने था अलग कुंड रख छोड़ा,
शायद सुभाष को पता चल गया थोड़ा।

“अब उन्हें और ऊँचा पद धरना होगा,
भारत की आजादी हित करना होगा।”
देना होगा बलिदान देश को निज का,
उत्तर देना ही होगा अपने खीज का।, “

शायद इसलिए उन्होंने दी कुर्वानी,
आजादी हित गढ़ ली नई कहानी।
छोड़ गए रोते, बिलखाते जन को,
पर दिया तसल्ली, अपने भाव, मनन को।

बोलो, सुभाष की जय, भारत के सारे,
अंततः खोल दी नूतन भाग्य हमारे।
यह प्रतिफल जो पाया उनके जीवन से,
अर्पण कर दिया सबों में, यहाँ लगन से।

उसी लग्नता को यह फूल समर्पित,
पूरी जीवन अपने सुभाष को अर्पित।
जय जय भारत, जय जय हम भारत बासी,
जिनके वर से बनते जो भी प्रत्यासी।

सबमें शक्ति का पुनः सृजन है करना,
यह फिजूल कर रहा नेता रख कर धरना।
सच्चा होता, हम, सारे सच्चे ,होते,
चाहे “कुर्बानी” देने हित हो मरना।

आसान नहीं है कहना, पूरा करना,
खून बहा कर दुश्मन से हो लड़ना।
पर सच्चा अर्पण और भला क्या होगा,
भारत को सुसज्जित करना और संवरना ।

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