नई दिल्ली – दिल्ली मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के कुछ ही दिन बचे हैं लेकिन मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा न होने से कई नामों पर अटकलें तेज हैं जिसमें कुमार विश्वास, प्रवेश वर्मा, बाँसुरी स्वराज, अभय वर्मा आदि के नाम के चर्चा के साथ संघ के एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के नाम की चर्चा तो नहीं

अटकलों की दौर है दिल्ली सी. एम. ना जाने कौन है? – अजीत सिन्हा
दिल्ली सी. एम. मनोनयन में संघ की भूमिका को नजरअंदाज नहीं की जा सकती
नई दिल्ली – दिल्ली मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के कुछ ही दिन बचे हैं लेकिन मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा न होने से कई नामों पर अटकलें तेज हैं जिसमें कुमार विश्वास, प्रवेश वर्मा, बाँसुरी स्वराज, अभय वर्मा आदि के नाम के चर्चा के साथ संघ के एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के नाम की चर्चा तो नहीं है लेकिन सूत्रों से मिली खबर के अनुसार योगी जैसे दबंग संघ शख्सियत भी मुख्यमंत्री बन सकते हैं या महिला कोटे से भी कोई मुख्यमंत्री बन सकती हैं लेकिन कयास तो कयास ही होते हैं लेकिन फैसले समय के गर्भ में छुपा हुआ है जिसे बी. जे. पी. शपथ ग्रहण समारोह के एक दिन पूर्व या कुछ घंटों पहले ही घोषित करेगी।
पहले से परिपाटी चली आ रही है कि विधायक दल के नेता ही मुख्यमंत्री होते हैं लेकिन इस परंपरा को बी. जे. पी. के साथ कॉंग्रेस के साथ अन्य दल भी तोड़ चुके हैं और हवाई सी. एम. की परिपाटी भी चल पडी है जिन्हें बाद में चुनाव लड़ाकर विधायक बना दिया जाता है।

सूत्र ये भी बता रहे हैं दिल्ली के सी. एम. के मसले पर फैसले हो चुके हैं केवल घोषणा ही बाकी है वहीं कई तरह के दबाव होने के कारण अभी भी मंथन जारी है ऐसी दूसरी सूत्र बता रही है वहीं संघ भी अपनी माथा घुसेड चुका है कि संघी ही मुख्यमंत्री की बागडोर को सम्हाले।

जिससे ये स्पष्ट हो रहा है कि इस बार या तो कोई महिला मुख्यमंत्री बनेगी क्योंकि कई पुरुष दावेदार हैं या कोई हार्ड कोर संघी ही मुख्यमंत्री पद का दावेदार होगा हालांकि संघ सत्ता की दावेदारी मे समय – समय पर अपनी भूमिका को नकारती रही है लेकिन भाजपा के शीर्षस्थ पदों पर संघी ही बैठे हैं जो उनकी नाकारी के नजरिये को गलत साबित करती है।
इस समय देश की मूड कुछ राज्यों को छोडकर हिन्दुत्व की आँधी की ओर है इसलिये किसी गांधीवादी की कल्पना मुख्यमंत्री के रूप में गलत ही साबित होगी और भाजपा के जीतने के बाद दिल्ली में जिस तरह से एक धर्म विशेष के लोंगों ने मेट्रो में उत्पात मचाई है उससे एक हार्ड मुख्यमंत्री की संभावना यदि व्यक्त की जा रही है जो शायद गलत नहीं हो सकती है। तथा साथ में केजरीवाल गुट द्वारा रोहिंग्या – बांग्लादेशियों को वोट खातिर बसाने की जो रायता फैलाई गई है उसके लिए भी एक हार्ड मुख्यमंत्री ही जरूरी मालूम पड़ रही है और इसमें दिवंगत सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज महिला कोटे से सही मालूम पड़ रही है और चूकी कुमार विश्वास पुराने आपिये रहे हैं और उनके मुख्यमंत्री बनने से बची खुची आप भी आधी हो जाएगी और कालांतर में साफ़ भी हो सकती है और सनातन की डंका भी बुलंद हो सकती है लेकिन कुमार विश्वास हार्ड मुख्यमंत्री कदापि नहीं हो सकते क्योंकि उनके लक्षण में योगी जैसी हार्डनेस नहीं है इसलिए इस बार पैराशूट संघी के भी मुख्यमंत्री बनने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है।
फ़िलहाल कुछ दिनों की बात है मुख्यमंत्री संबंधित फैसले का मामला जल्द ही साफ़ हो जाएगा और निश्चित रूप से इस बार दिल्ली को एक एक उपयुक्त मुख्यमंत्री मिलेगा, ऐसी संभावना दिल्ली की जनता व्यक्त कर रही है।



