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महिमा का गुण गान करुँ मैं
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नव दुर्गा के नए रुप का हर पल तेरा
ध्यान धरूँ मैं।
चिंता हरणी माँ दुर्गा की महिमा का
गुण गान करुँ मैं।।
हम अवोध वालक हैं माता
आज खड़ा आपके सामने।
आशीर्वाद आपका पाने
को, हम सारे लगे नाचने।
भवसागर पार उतारने को जगदम्बे
प्रणाम करुँ मैं ?
चिंता हरणी माँ दुर्गा की महिमा का
गुण गान करुँ मैं?
है उठाई घोर कस्ट माँ !
वर्षा कर दी आशीष आपने।
घोर संकट से उवारने को
हाथ बढ़ा कर लगी थामने।
समस्याओं के समधान हित माँ का
आह्वान करुँ मैं?
चिंता हरणी माँ दुर्गा की महिमा का
गुण गान करुँ मैं?
पूजा में तल्लीन रह कर
जँहा कहो हम मिलेंगे वहाँ।
सिलसिला है युगों से आरहा
ढूढ़ते हम आप होती जँहा।
असुरनिकन्दनि,पाप नाशनी माँ का ही सम्मान करुँ मैं।
चिंता हरणी माँ दुर्गा की महिमा का
गुण गान करुँ मैं?
भक्ति के लायक बनाई हमें
माँ निज स्नेह से सींची हमें।
जग की पीड़ा को हड़ने के
खातिर माँ ने बुलाया हमें ।
कस्ट हारिनी मातापर ही अर्पित अपना प्राण करुँ मैं ।
चिंता हरणी माँ दुर्गा की महिमा का
गुण गान करुँ मैं।।
बनी रहेगी कृपा आपकी
तो जग में हमें अब डर कहाँ?
विनती सुनों अब हमारी माँ
जो कहोगी हम करेंगे यहाँ।
प्रेम ,दया,करुणा की मां का ही हरदम
ध्यान धरूँ मैं ।
चिंता हरणी माँ दुर्गा की महिमा का
गुण गान करुँ मैं?
समाप्त
रबीन्द्र कुमार रतन
स्वतंत्र लेखन ।