गंगा दशहरा पर स्वामी चिदात्मन महाराज के सानिध्य में , की गई गंगा महाआरती ।

गंगा दशहरा पर स्वामी चिदात्मन महाराज के सानिध्य में , की गई गंगा महाआरती ।
अशोक पासवान ब्यूरो आपकी आवाज।
गंगा दशहरा के पावन अवसर पर गुरुवार को विगत साल की भांति इस साल भी राम जानकी घाट पर परम पुज्य स्वामी चिदात्मन महाराज के सानिध्य में विधिवत गंगा महाआरती का आयोजन किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा की मां गंगा जो सब प्रकार के पाप-ताप को दूर करने वाली जो ब्रह्मा जी के कमंडलों में शंकर भगवान के जटा में विराजने वाली मां गंगा सब प्रकार से सुख देने वाली ममतामयी मां गंगा हैं वहीं मां गंगा की महा आरती स्वामी चिदात्मन जी महाराज की सानिध्य में की गई, उन्होंने कहा कि मां गंगा इस धारा धाम पर अमृत की धारा कही गई है, विश्व में भारत का ही यह सौभाग्य है जहां गोमुख से गंगासागर तक सभी दुखों को हरने वाली मां गंगा छल छल प्रवाहित होती हुई प्रवाह युक्त होने की प्रेरणा देती है वह धरा धाम पर उतरने के बाद सबसे पहले हरिद्वार प्रयाग काशी हरिहर क्षेत्र के साथ-साथ आदि कुंभ स्थल सिमरिया धाम सुल्तानगंज से होते हुए गंगा सागर तक अपना विशिष्ट स्थान रखती है जहां वैशाख में हरिद्वार में प्रज्ञा और कार्तिक में सिमरिया धाम में कल्पवास अर्ध कुंभ और महाकुंभ के रूप में सर्व विदित है । यह सुनहरा मौका केवल पुनीत जेठ महीने में गंगा दशहरा को मात्र स्नान कर लेने से वह 10 प्रकार के पापों से मुक्त होते हैं उनकी सारी मनोरथ सिद्ध हो जाती है सिमरिया धाम में प्रतिवर्ष सर्व मंगला परिवार के सौजन्य से आदि कुंभ स्थली अनियन शास्त्रोक्त कार्यक्रम के साथ-साथ प्रतिवर्ष गंगा दशहरा के पावन अवसर पर राम जानकी घाट पर मां गंगा की पूजा करती आई है जिसमें वर्तमान सरकार के साथ-साथ जिलाधिकारी को इस ओर घ्यान आकृष्ट किया गया है, सर्व मंगला परिवार के विद्यापीठ में गंगा प्रवाह प्रदूषण मुक्ति मंच, वेद विज्ञान अनुसंधान संस्थान ,मिथिला मैथिली विकास सेवा समिति, सर्व मंगल गंगा महिला गोष्ठी के साथ-साथ राष्ट्र हित जनहित में कई कार्यक्रम किए जा रहे हैं।जिसमें मुख्य यजमान सर्वमंगला आध्यात्मिक योग विद्यापीठ के व्यवस्थापक रविन्द्र ब्रह्मचारी,सचिव दिनेश प्रसाद सिंह, मीडिया प्रभारी नीलमणि, अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी, विद्यापीठ के महासचिव राजकिशोर प्रसाद सिंह शक्ति समिति की उषा रानी,अमरेंद्र कुमार कौशलेंद्र कुमार पप्पू त्यागी संजयनंद, तरुण सिंह बबलू सिंह, मुख्य आचार्य पंडित नारायण झा, पंडित रमेश झा, सदानंद झा, पंडित राम झा, श्याम झा लक्ष्मण झा समेत सैकड़ों श्रद्धालु भक्तजनों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।


