
50 लाख घूस कांड से हिला प्रशासन, के. नगर अंचलाधिकारी पर गंभीर आरोप — ऑडियो वायरल
50 लाख घूस कांड से हिला प्रशासन, के. नगर अंचलाधिकारी पर गंभीर आरोप — ऑडियो वायरल
50 लाख घूस कांड से हिला प्रशासन, के. नगर अंचलाधिकारी पर गंभीर आरोप — ऑडियो वायरल
मोटेशन के नाम पर महीनों तक टॉर्चर, रिश्वत नहीं देने पर दाखिल–खारिज रद्द करने का सनसनीखेज दावा
पूर्णिया |

पूर्णिया जिले के कृत्यानंद नगर (के. नगर) अंचल कार्यालय से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने बिहार की राजस्व व्यवस्था और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
के. नगर के अंचलाधिकारी दिवाकर कुमार पर 50 लाख रुपये घूस मांगने का गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगा है। आरोप से जुड़ा ऑडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल होते ही जिले भर में हड़कंप मच गया है।
“रिश्वत नहीं दी तो फाइल दबा दी गई” — निदेशक का खुला आरोप
यह आरोप शिवम हायर एजुकेशन फाउंडेशन के निदेशक पंकज कुमार निराला ने लगाया है। उनका कहना है कि—
“मोटेशन (दाखिल–खारिज) के नाम पर मुझे कई महीनों से लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। बिचौलियों के जरिए 50 लाख रुपये की डिमांड की गई। जब मैंने पैसे देने से इनकार किया, तो मेरा दाखिल–खारिज आवेदन रद्द कर दिया गया।”
उनका दावा है कि यह पूरा खेल सोची-समझी साजिश के तहत किया गया ताकि रिश्वत वसूली जा सके।
ऑडियो वायरल होते ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप
मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब कथित रूप से घूस मांगने से जुड़ा ऑडियो क्लिप वायरल हो गया।
ऑडियो में मोटेशन के बदले मोटी रकम की बातचीत होने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि, 👉 ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है,
लेकिन इसके वायरल होते ही राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
एक ही जमीन, दोहरा खेल? विक्रेता को जमाबंदी, क्रेता को आपत्ति
मामले में सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा होता है जब यह तथ्य सामने आता है कि—
इसी भूमि पर
विक्रेता प्रणव चौधरी के नाम से
पहले ही जमाबंदी कायम कर दी गई जबकि वैध क्रेता नूतन कुमारी (पति: पंकज कुमार निराला) के नाम से दाखिल–खारिज पर
👉 बार-बार आपत्ति,
👉 फाइल लटकाना,
👉 और अंततः आवेदन रद्द कर दिया गया।
सवाल साफ है —
क्या कानून सबके लिए एक जैसा नहीं?
टाइटल सूट का बहाना या चुनिंदा कार्रवाई?
अंचल कार्यालय की ओर से आपत्ति में टाइटल सूट संख्या 311/2011 लंबित होने का हवाला दिया गया, लेकिन—
यही टाइटल सूट विक्रेता की जमाबंदी में बाधा क्यों नहीं बना?
अगर जमीन विवादित थी, तो पहले जमाबंदी कैसे कर दी गई?
👉 यह विरोधाभास पूरे मामले को संदेह और भ्रष्टाचार के घेरे में खड़ा करता है।
डीएम से लेकर उपमुख्यमंत्री तक शिकायत
पीड़ित पक्ष ने मामले की लिखित शिकायत—
जिलाधिकारी, पूर्णिया
माननीय उपमुख्यमंत्री सह भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री, बिहार सरकार
को देकर मांग की है कि—
पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए
वायरल ऑडियो की फॉरेंसिक जांच हो
दोषी पाए जाने पर अंचलाधिकारी सहित सभी जिम्मेदारों पर
कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई हो
प्रशासन की चुप्पी, जनता में उबाल
अब तक—
न अंचलाधिकारी दिवाकर कुमार की कोई आधिकारिक सफाई आई है
न जिला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान
जिससे जनता में आक्रोश, और
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल और गहरे होते जा रहे हैं।
राजस्व विभाग की साख दांव पर
यह मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत नहीं, बल्कि
राजस्व विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार,
बिचौलियों के बढ़ते प्रभाव,
और आम लोगों के अधिकारों के दमन की तस्वीर पेश करता है।
अब सबकी निगाहें राज्य सरकार और बिहार राजस्व विभाग पर टिकी हैं—
क्या निष्पक्ष जांच होगी?
क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी?
या यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?



