बिहार एवं झारखंड

सहयोग: मानवता की सबसे बड़ी शक्ति

सहयोग: मानवता की सबसे बड़ी शक्ति

सहयोग: मानवता की सबसे बड़ी शक्ति

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। उसका अस्तित्व, विकास और उन्नति केवल उसके व्यक्तिगत प्रयासों पर नहीं, बल्कि आपसी सहयोग पर आधारित है। सहयोग वह अदृश्य शक्ति है जो बिखरे हुए प्रयासों को एक दिशा देती है और साधारण कार्यों को असाधारण उपलब्धियों में बदल देती है।
इतिहास साक्षी है कि जब-जब मानव ने मिलकर कार्य किया है, तब-तब असंभव लगने वाले कार्य भी संभव हुए हैं। चाहे प्राकृतिक आपदाओं से निपटना हो, समाज सुधार के आंदोलन हों या राष्ट्र निर्माण का कार्य—सहयोग ने हर बार मानवता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। अकेला व्यक्ति सीमित होता है, लेकिन सामूहिक प्रयास असीम संभावनाएँ लेकर आता है।
परिवार से लेकर समाज तक, सहयोग जीवन को सहज और सुखद बनाता है। परिवार में आपसी सहयोग से प्रेम, समझ और विश्वास का वातावरण बनता है। समाज में सहयोग से सेवा, करुणा और सह-अस्तित्व की भावना विकसित होती है। यही भावना मानवता को संवेदनशील और जीवंत बनाए रखती है।
आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में सहयोग का महत्व और भी बढ़ गया है। केवल आगे निकलने की दौड़ में हम अक्सर सहयोग के मूल्य को भूल जाते हैं, जबकि सच्ची प्रगति वही है जो सबको साथ लेकर चले। सहयोग हमें यह सिखाता है कि किसी की सहायता करना कमजोरी नहीं, बल्कि मानवीय शक्ति का प्रतीक है।
अंततः कहा जा सकता है कि सहयोग मानवता की आत्मा है। जब हाथ में हाथ और मन में संवेदना होती है, तब ही मानव जीवन सार्थक बनता है। सहयोग के बिना विकास अधूरा है और सहयोग के साथ मानवता अजेय।
अनिल माथुर
ज्वाला-विहार, जोधपुर।

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