Blog

पीपीयू मुख्यालय पर ऐतिहासिक जुटान, न्यायालय के आदेश और समिति की सिफारिशों के क्रियान्वयन की उठी मांग

पीपीयू मुख्यालय पर ऐतिहासिक जुटान, न्यायालय के आदेश और समिति की सिफारिशों के क्रियान्वयन की उठी मांग

पटना में शिक्षकों का विस्फोटक प्रदर्शन: फैक्टनेब के बैनर तले गरजी शिक्षकों की आवाज़, सरकार से दो-टूक — “वेतन-पेंशन दो या जवाब दो!”

पीपीयू मुख्यालय पर ऐतिहासिक जुटान, न्यायालय के आदेश और समिति की सिफारिशों के क्रियान्वयन की उठी मांग

पटना ।

पटना में बुधवार को शिक्षाकर्मियों का आक्रोश फूट पड़ा। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय मुख्यालय पर बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) के आह्वान पर सैकड़ों शिक्षकों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया।

नालंदा और पटना जिले के संबद्ध कॉलेजों से जुटे शिक्षकों ने सरकार की अनदेखी, न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और वित्तीय उपेक्षा के खिलाफ एकजुट होकर हुंकार भरी —

> “न्यायादेश लागू करो, बकाया भुगतान करो!”

प्रमुख माँगें — सरकार से सीधा सवाल:

2015–18 तक के आठ सत्रों का बकाया अनुदान तत्काल खातों में दिया जाए

वेतन और पेंशन भुगतान न्यायालय व विधान परिषद की सिफारिशों के अनुसार हो

शासी निकायों में विश्वविद्यालय प्रतिनिधि और शिक्षक चुनाव प्रक्रिया शुरू हो

उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन का पारिश्रमिक बढ़े और 15 दिन में भुगतान हो

2007 के बाद नियुक्त शिक्षकों की सेवा अनुमोदन हेतु चयन समिति बने

अनुदान मांगने का विभागीय पोर्टल चालू किया जाए

स्नातक और इंटर स्तर पर बंधेज खत्म हो

धरना स्थल पर नेताओं की गरज:

फैक्टनेब महासचिव प्रो. राजीव रंजन, पीपीयू अध्यक्ष डॉ. रामनरेश प्रसाद, डॉ. रविकांत सिंह, प्रो. सत्येन्द्र कुमार, डॉ. कौशलेंद्र कुमार, डॉ. सारदा कुमारी, डॉ. दिलीप कुमार सहित दर्जनों वक्ताओं ने दो-टूक कहा:

> “अगर सरकार शिक्षकों की न्यायोचित मांगों पर चुप रही तो आंदोलन का अगला चरण और ज़ोरदार होगा।”

अगली चेतावनी — 22 जुलाई को बिहार विधानमंडल पर महाधरना

फैक्टनेब ने एलान किया कि
👉 “22 जुलाई को विधानमंडल के समक्ष ‘वेतन-पेंशन भुगतान करो’ महासंकल्प सभा होगी — पटना की सड़कों पर शिक्षकों की ताक़त दिखेगी!”

कुलपति से वार्ता, मिला आश्वासन:

कुलपति प्रो. उपेन्द्र प्रसाद सिंह और विश्वविद्यालय अधिकारियों ने मौके पर धरना नेताओं से बातचीत की और एक सप्ताह के भीतर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

धरना स्थल से झलक:

तख्तियों पर लिखा था: “शिक्षा की रीढ़ को मत तोड़ो”, “मानवाधिकार नहीं, हमारा अधिकार दो!”

नारों से गूंजता रहा परिसर: “मांगे पूरी करो या कुर्सी छोड़ो!”

महिला शिक्षकों की भी गरिमामयी और जोशीली भागीदारी

फैक्टनेब की चेतावनी स्पष्ट:

“अब चुप नहीं बैठेंगे — न्याय, हक़ और सम्मान की ये लड़ाई निर्णायक होगी!”

Join WhatsApp Channel Join Now
Subscribe and Follow on YouTube Subscribe
Follow on Facebook Follow
Follow on Instagram Follow
Download from Google Play Store Download

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button