बिहार एवं झारखंड

फिल्मकार एन मंडल के नेतृत्व में धानुक एकता महासंघ बिहार में नए दौर में प्रवेश

फिल्मकार एन मंडल के नेतृत्व में धानुक एकता महासंघ बिहार में नए दौर में प्रवेश

फिल्मकार एन मंडल के नेतृत्व में धानुक एकता महासंघ बिहार में नए दौर में प्रवेश

अखिल भारतीय धानुक एकता महासंघ के बिहार प्रदेश अध्यक्ष का चयन एवं प्रदेश संगठन का पुनर्गठन कार्यक्रम गुरुवार को दरभंगा जिले के छोटाईपट्टी गांव में शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और सर्वसम्मति से सम्पन्न हुआ। इस पूरे कार्यक्रम की वैचारिक दिशा, सांस्कृतिक स्वरूप और संगठनात्मक संरचना को आकार देने में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह कला-संस्कृति मंत्री एन. मंडल की केंद्रीय भूमिका रही।

बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ० नारायण मंडल ने की, जबकि कार्यक्रम की संकल्पना, संचालन और दिशा-निर्देशन एन. मंडल की देखरेख में सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर नवोदय विद्यालय से सेवानिवृत्त प्राचार्य श्री सियाराम मंडल को सर्वसम्मति से अखिल भारतीय धानुक एकता महासंघ, बिहार प्रदेश का नया अध्यक्ष चुना गया। यह निर्णय संगठन के भीतर व्यापक संवाद, सहमति और विश्वास के वातावरण में लिया गया।

एन. मंडल का विज़न : संगठन, संस्कृति और समाज का संगम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए फ़िल्मकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता एन. मंडल ने कहा —
“अखिल भारतीय धानुक एकता महासंघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक आत्मसम्मान और राजनीतिक भागीदारी का आंदोलन है। हमारा लक्ष्य एक संगठित, शिक्षित, आत्मनिर्भर और सम्मानित धानुक समाज का निर्माण है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार में संगठन के विस्तार और मजबूती में युवाओं, संस्कृति और संवाद की भूमिका निर्णायक होगी।

एन मंडल की पहल : गीतों के माध्यम से आंदोलन को जन-जन तक ले जाने की रणनीति
एन. मंडल ने इस अवसर पर संगठनात्मक जागरूकता और जनसंपर्क के लिए दो विशेष गीत प्रस्तुत किए और उन्हें महासंघ के अभियानों में आधिकारिक रूप से अपनाने का सुझाव दिया।

धानुक एकता थीम सॉन्ग —
“धानुक की शान — एकता हमारी जान,
हाथ में हाथ लेकर बढ़ें नया अरमान।
एक आवाज़, एक पहचान,
धानुक समाज — भारत की शान!”

‘धानुक जोड़ो यात्रा’ अभियान गीत —
“धानुक जोड़ो यात्रा आई — एकता का पैग़ाम लाई,
गांव-गांव चले ये कारवां — नई पहचान लाई!”

एन. मंडल ने कहा कि सांस्कृतिक माध्यम आंदोलन को स्थायित्व, भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक स्वीकार्यता देते हैं, इसलिए इन्हें सभाओं, यात्राओं और अभियानों में नियमित रूप से प्रयोग किया जाना चाहिए।

युवा मोर्चा यथावत, लेकिन नेतृत्व के अनुशासन में
बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि बिहार पूर्व युवा मोर्चा की मौजूदा टीम — अध्यक्ष राजेश मंडल और उनकी पूरी टीम — फिलहाल यथावत रहेगी, लेकिन भविष्य में कोई भी संगठनात्मक परिवर्तन केवल नव-निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष की अनुमति से होगा।

नव-निर्वाचित अध्यक्ष सियाराम मंडल का वक्तव्य
प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने के बाद सियाराम मंडल ने कहा —
“मैं इस दायित्व को सत्ता नहीं, सेवा के रूप में निभाऊँगा। शिक्षा, संगठनात्मक अनुशासन और समाज के अधिकार मेरी प्राथमिकता होंगे।”

राज्य स्तरीय सहभागिता और समावेशी पुनर्गठन
बैठक में सुपौल, मधुबनी, दरभंगा, बेगूसराय, समस्तीपुर सहित कई जिलों से प्रतिनिधि उपस्थित थे, जबकि छपरा और पटना से सदस्य ऑनलाइन जुड़े। इससे यह बैठक एक वास्तविक राज्य स्तरीय स्वरूप में परिवर्तित हो गई।

यह भी तय हुआ कि शीघ्र ही उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव, कोषाध्यक्ष, महिला विंग और विभिन्न प्रकोष्ठों की नियुक्तियाँ की जाएँगी, जिनमें महिलाओं और सभी जिलों को समुचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।

एक वैचारिक, सांस्कृतिक और संगठनात्मक पुनर्जागरण
छोटाईपट्टी की यह बैठक केवल एक चुनाव नहीं थी, बल्कि यह एन. मंडल के वैचारिक नेतृत्व में धानुक समाज के सांस्कृतिक पुनर्जागरण, संगठनात्मक पुनर्निर्माण और सामाजिक आत्मसम्मान की दिशा में एक ठोस कदम बनी।

यह स्पष्ट हुआ कि अखिल भारतीय धानुक एकता महासंघ बिहार में अब केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक उद्देश्यपूर्ण, अनुशासित और दूरदर्शी सामाजिक आंदोलन के रूप में आगे बढ़ रहा है — जिसके केंद्र में संवाद, संस्कृति और संगठन की त्रिवेणी है, और जिसकी धुरी हैं एन. मंडल।

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