
मतदाता पुनरीक्षण पर जमीनी रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार अजित अंजुम के खिलाफ बेगुसराय में चुनाव आयोग के इशारों पर एफआईआर दर्ज
आखिर क्या करना चाहती नीतीश सरकार?लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया के अभिव्यक्ति पर खतरा
मतदाता पुनरीक्षण पर जमीनी रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार अजित अंजुम के खिलाफ बेगुसराय में चुनाव आयोग के इशारों पर एफआईआर दर्ज
आखिर क्या करना चाहती नीतीश सरकार?लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया के अभिव्यक्ति पर खतरा

आर०के० राय
समस्तीपुर: मतदाता पुनरीक्षण पर जमीनी रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार अजित अंजुम के खिलाफ बेगुसराय में चुनाव आयोग के इशारों पर एफआईआर की गयी है. जिस तरह की धारायें उनके खिलाफ लगायी गयी हैं उससे लगता है कि उन्हें अगले पांच वर्षों तक सलाखों में कैद करने की योजना है. ऐसा लगता है कि पिछले ग्यारह वर्षों में अजित अंजुम की जमीनी पत्रकारिता ने जिस तरह सत्तानशीनों के पसीने छुड़ाये. चाहे यह किसान आंदोलन हो या मानवाधिकार जैसे मुद्दे पर अंजुम ने सत्तानशीनों को बेचैन किया,
उस सब का अब बदला लेने की तैयारी है.
तानाशाहों की यह फितरत रही है कि वे स्वतंत्र आवाजें नापसंद करते हैं. इसलिए जब बिहार के विभिन्न जिलों से होते हुए बेगूसराय में अजित अंजुम ने मतदाता विशेष पुनरीक्षण पर चुनाव आयोग की कलई खोली तो शायद उनके खिलाफ ‘दिल्ली’ से हुक्म आया कि उन पर न सिर्फ नकेल लगाओ बल्कि ऐसी-ऐसी धाराओं में फंसाओ कि वर्षों तक उनकी आवाज खामोश हो जाये.
आखिर नीतीश सरकार क्या कर रही है? जिस तरह जान जोखिम में डाल कर कठिनाइयों से पत्रकार मामला उजागर करते उन्हें ही जेल, आखिर क्यों।
बेगूसराय जिले के जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचित पदाधिकारी द्वारा देश के जाने माने पत्रकार अजीत अंजुम पर मुकदमा किया जाना लोकतंत्र पर हमला है, बिहार सरकार और चुनाव आयोग के इस हरकत बिहार के झंझट टाइम्स के संपादक आर०के०राय ने तीव्र निन्दा की है।


