
नंद किशोर झा बोले—शिक्षा, उद्योग, महिला सशक्तिकरण और किसानों पर फोकस से समृद्धि की रफ्तार होगी तेज
नंद किशोर झा बोले—शिक्षा, उद्योग, महिला सशक्तिकरण और किसानों पर फोकस से समृद्धि की रफ्तार होगी तेज
3.47 लाख करोड़ का ‘मेगा बजट’—विकसित बिहार की ब्लूप्रिंट या आर्थिक क्रांति?

नंद किशोर झा बोले—शिक्षा, उद्योग, महिला सशक्तिकरण और किसानों पर फोकस से समृद्धि की रफ्तार होगी तेज
सहरसा।
बिहार विधानसभा में पेश 2026-27 का 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट केवल आंकड़ों का विस्तार नहीं, बल्कि विकसित और समृद्ध बिहार की एक व्यापक रूपरेखा है। राजेन्द्र मिश्र महाविद्यालय के प्रशाखा पदाधिकारी नंद किशोर झा ने इसे राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा और प्रगतिशील बजट बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ेगा।
झा के अनुसार, बजट में विकास, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्ध बिहार की सोच दोनों की झलक दिखाई देती है। यह बजट गरीबों और वंचितों के जीवन को आसान बनाने के साथ प्रदेश को आत्मनिर्भर राज्यों की कतार में खड़ा करने की क्षमता रखता है।
शिक्षा को सबसे बड़ा हिस्सा
वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा प्रस्तुत 3,47,589.76 करोड़ रुपये के बजट में सबसे अधिक करीब 68,216.95 करोड़ रुपये शिक्षा क्षेत्र के लिए निर्धारित किए गए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में बजट आकार में 30,694 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। योजना मद में 1,22,155 करोड़ और स्थापना व प्रतिबद्ध व्यय में 2,25,434 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है।
किसानों के खाते में बढ़ेगी ताकत
बजट में मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की घोषणा की गई है, जिसके तहत किसानों को सालाना 3,000 रुपये राज्य सरकार की ओर से मिलेंगे। यह राशि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अतिरिक्त होगी, जिससे किसानों को कुल 9,000 रुपये प्रतिवर्ष मिलने का रास्ता साफ होगा। कृषि रोडमैप को आगे बढ़ाते हुए हर खेत तक सिंचाई, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट और एग्री-स्टार्टअप को बढ़ावा देने की योजना है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग पर बड़ा दांव
राज्य सरकार ने सड़क, पुल, बिजली, जल, भवन और सिंचाई परियोजनाओं को प्राथमिकता देते हुए 63,455.84 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय तय किया है, जो कुल बजट का लगभग 18 प्रतिशत से अधिक है। औद्योगिक विकास और निजी निवेश आकर्षित करने की रणनीति के तहत कौशल विकास और युवा प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है, ताकि 2025 से 2030 के बीच एक करोड़ रोजगार सृजित किए जा सकें।
महिला सशक्तिकरण को नई उड़ान
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 1.56 करोड़ से अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पहले दी गई 10,000 रुपये की सहायता के बाद अब व्यवसाय विस्तार हेतु दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता या ऋण उपलब्ध कराने की योजना है। जीविका मॉडल को रोजगार का प्रमुख आधार बनाने पर भी जोर दिया गया है।
स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और ऊर्जा पर फोकस
ग्रामीण विकास को 23,701.18 करोड़, स्वास्थ्य को 21,270.40 करोड़, गृह विभाग को 20,132.87 करोड़ और ऊर्जा विभाग को 18,737.06 करोड़ रुपये दिए गए हैं। अनुसूचित जाति के लिए 19,603 करोड़ और अनुसूचित जनजाति के लिए 1,648 करोड़ रुपये का प्रावधान सामाजिक संतुलन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी स्तर तक अपग्रेड करने और तकनीकी शिक्षा के विस्तार की भी योजना है।
राजस्व प्राप्ति 2,85,277 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें राज्य के अपने कर से 65,800 करोड़ और केंद्र से 1,58,178 करोड़ रुपये सहायता व अनुदान के रूप में मिलने का अनुमान है। साथ ही सौर और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार, गंगा जल आपूर्ति योजनाओं के प्रसार और शहरी गरीबों के लिए सस्ते आवास पर भी जोर दिया गया है।
नंद किशोर झा ने विश्वास जताया कि यह बजट “सम्पन्न बिहार और समृद्ध बिहार” के संकल्प को नई गति देगा और राज्य को देश के अग्रणी विकसित प्रदेशों की श्रेणी में पहुंचाने की मजबूत आधारशिला साबित होगा।