
जनवादी लोककवि रामधारी खटकड़ नहीं रहे

रोहतक। हरियाणवी लोककवि, सामाजिक-राजनीतिक चिंतक और शिक्षक रामधारी खटकड़ नहीं रहे। बीमारी के चलते आज सुबह उनका निधन हो गया। प्रदेश की अनेक साहित्यिक संस्थाओं के हिस्से रहे रामधारी को शहर के साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कला एवं शिक्षा जगत से जुड़ी हस्तियों ने स्थानीय शीला बाईपास स्थित रामबाग श्मशान घाट पर अंतिम विदाई दी।
जींद जिले के गाँव खटकड़ के मूल निवासी मास्टर रामधारी प्रगतिशील, जनवादी और क्रांतिकारी रागनियों के लिए जाने जाते हैं। अपनी ओजस्वी वाणी में तीखे तेवरों के साथ विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक व समसामयिक मुद्दों पर करारे कटाक्ष करने की विशेषता के चलते वे काव्य गोष्ठियों व साहित्यिक समारोहों में प्राण फूंक देते थे। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में सेवानिवृत्त रामधारी लेखन के साथ-साथ शिक्षण में भी रुचि रखते थे। उन्होंने शहर के अनेक प्रतिष्ठित स्कूलों में विद्यार्थियों को हिंदी विषय पढ़ाया और उन्हें प्रगतिशील मूल्यों की शिक्षा देते हुए उनकी प्रतिभा को निखारने का काम किया। 1990 से लगातार अपनी रागनियों के माध्यम से समाज को जगाने वाले लोककवि रामधारी खटकड़ का रागनी संग्रह ‘आप लड़े बिन मुक्ति कोन्या’ का लोकार्पण लगभग तीन महीने पहले ही हुआ था।
हरियाणा काव्य मंच, शैली साहित्यिक मंच, स्पंदन, जनवादी लेखक संघ, सप्तरंग, सप्तक सांस्कृतिक संस्था, साहित्य सम्पदा, हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति, अभिनव टोली, गांधी स्कूल, नागरिक मंच, हिम्मत व देसी काव्य मंच सहित विभिन्न संस्थाओं की ओर से पवन मित्तल, चन्द्र दत्त शर्मा, वीरेन्द्र मधुर, सुनित धवन, डॉ. रणबीर दहिया, अविनाश सैनी, डॉ. जोगेंद्र मोर, डॉ. रमणीक मोहन, जगमति सांगवान, पवन गहलौत, संदीप शर्मा, मनीषा, प्रमोद गौरी, विश्व दीपक त्रिखा, लाभ सिंह हुड्डा, कृष्ण लाल गिरधर, जगदीप जुगनू, नरेश शर्मा, विष्णु मित्र सैनी, सुरेन सरकार, सोनिका सवेरा ने गहरा शोक व्यक्त करते कहा कि हरियाणवी काव्य की प्रगतिशील धारा के सशक्त हस्ताक्षर, हरदिल अज़ीज व दबंग आवाज़ के धनी रामधारी खटकड़ के निधन से हरियाणवी काव्य जगत की अपूरणीय क्षति है।
– अविनाश सैनी



