
प्रज्ञा-प्रवाह (चेतना), उत्तर बिहार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष को समाजोत्सव के रूप में मना रहा है।
प्रज्ञा-प्रवाह (चेतना), उत्तर बिहार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष को समाजोत्सव के रूप में मना रहा है।
प्रज्ञा-प्रवाह (चेतना), उत्तर बिहार
मुजफ्फरपुर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष को समाजोत्सव के रूप में मना रहा है। इस उपलक्ष्य में व्यापक गृह-संपर्क अभियान से लेकर समाज के अग्रगण्य जनों के साथ संवाद जैसे विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में वैचारिक क्षेत्र में सक्रिय संस्था प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय सह-संयोजक श्री विनय दीक्षित जी का एक दिवसीय प्रवास मुजफ्फरपुर में सम्पन्न हुआ।
प्रज्ञा प्रवाह की स्थानीय महिला इकाई द्वारा समाज के प्रबुद्ध जनों के साथ एक परिचयात्मक बैठक का आयोजन दिनांक 11 फरवरी 2026 को अपराह्न 3 बजे, डॉ॰ ममता रानी, प्राचार्य, ललित नारायण तिरहुत महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर के आवास पर किया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए श्री विनय दीक्षित जी ने भारत-केन्द्रित विमर्श की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन, परंपरा और सांस्कृतिक दृष्टि को अकादमिक एवं बौद्धिक मंचों पर स्थापित करना समय की मांग है। उन्होंने विशेष रूप से बुद्धिजीवी वर्ग की महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि महिला आयाम समाज में वैचारिक संवाहक की महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। महिलाओं के माध्यम से भारतीय दृष्टि को परिवार, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक मंचों तक सशक्त रूप में पहुँचाया जा सकता है।
उन्होंने प्रज्ञा प्रवाह की कार्यपद्धति, उद्देश्यों एवं भारत-केंद्रित बौद्धिक संवाद की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही, भारत की अग्रणी एवं प्रेरणादायी महिलाओं की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भूमिका को समाज के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर डॉ॰ ममता रानी, प्राचार्य, ललित नारायण तिरहुत महाविद्यालय ने भारतीय परंपरा की विदुषी एवं आदर्श नारी पात्रों—सीता और द्रौपदी—के जीवन से समाज को प्रेरणा देने के विभिन्न आयामों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इन चरित्रों के माध्यम से नारी के धैर्य, साहस, कर्तव्यनिष्ठा और आत्मबल को समाज तक पहुँचाया जाना चाहिए।
मुजफ्फरपुर प्रांत संयोजक श्री विजय शाही ने प्रज्ञा प्रवाह के उद्देश्यों और उसके बौद्धिक विस्तार की दिशा पर अपने विचार रखे। क्षेत्र प्रचारक श्री देवब्रत जी ने भी संगठन के वैचारिक ध्येय एवं सामाजिक उत्तरदायित्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में मुजफ्फरपुर विभाग के संयोजक श्री कन्हैया जी, श्री सुनील कुमार (सहायक प्राध्यापक, रसायन विभाग, ललित नारायण तिरहुत महाविद्यालय), श्रीमती रिंकी (सहायक प्राध्यापिका) एवं शोध छात्राएँ उपस्थित रहीं। सभी की गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ी।
कार्यक्रम की संयोजिका डॉ॰ अर्चना सिंह (महिला आयाम संयोजिका, मुजफ्फरपुर विभाग) ने महिला आयाम के अंतर्गत आयोजित आभासी मंचों एवं बौद्धिक कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए उनके अनुभव एवं भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महिला आयाम के माध्यम से भारतीय दृष्टि पर आधारित विमर्श को और अधिक सशक्त एवं संगठित रूप दिया जाएगा।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्र एवं समाज के प्रति समर्पित भाव के साथ हुआ।