
रेरा (RERA) कानून की साप्ताहिक विशेष श्रृंखला रेरा दृष्टि तृतीय किस्त
रेरा (RERA) कानून की साप्ताहिक विशेष श्रृंखला रेरा दृष्टि तृतीय किस्त
रेरा (RERA) कानून की साप्ताहिक विशेष श्रृंखला
रेरा दृष्टि तृतीय किस्त

नमस्कार दोस्तों,
पिछली कड़ी में हमने जाना कि धारा 4 कैसे किसी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को शुरू होने से पहले ही “कानूनी और पारदर्शी”बनाती है।आज की कड़ी में एक बहुत ही आम लेकिन ज़रूरी सवाल का जवाब ढूँढते हैं :-
– बिल्डर ने रेरा में पंजीकरण के लिए आवेदन तो कर दिया, अब आगे क्या?
– क्या कोई देखता भी है कि काग़ज़ सही हैं या नहीं?
इसका सीधा और साफ़ जवाब है— रेरा की धारा 5।
आम ज़िंदगी का उदाहरण समझिए। मान लीजिए आपने अपने बच्चे का दाख़िला किसी अच्छे स्कूल में करवाने के लिए आवेदन किया। आप फ़ॉर्म भर देते हैं, फीस जमा कर देते हैं। अब क्या स्कूल मनमाने ढंग से महीनों तक चुप रह सकता है? नहीं। स्कूल को एक तय समय में यह बताना होता है कि दाख़िला हुआ या नहीं और अगर नहीं हुआ, तो कारण क्या है? रेरा की धारा 5 भी बिल्कुल यही काम करती है।
धारा 5 क्या कहती है?
धारा 5 कहती है कि जब कोई बिल्डर रेरा में प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करता है, तो रेरा अथॉरिटी को 30 दिनों के भीतर यह तय करना होगा कि प्रोजेक्ट मंज़ूर होगा या नामंज़ूर। यानी फ़ाइलें दफ़्तरों में लटकती नहीं रहेंगी। 30 दिन का नियम क्यों इतना ज़रूरी है? पहले क्या होता था? बिल्डर कहता था— परियोजना का निर्माण शुरू करने के लिए विशेष मंजूरी के लिए फाइल लंबित है। खरीदार सोचता था कहीं प्रोजेक्ट फँस तो नहीं गया? अब रेरा ने साफ़ कर दिया 30 दिन के अंदर फैसला ज़रूरी है। अगर रेरा 30 दिन में कोई जवाब नहीं देता, तो कानून मान लेता है कि प्रोजेक्ट रजिस्टर हो गया है। इसे कहते हैं— खरीदार और बिल्डर दोनों के लिए मानसिक राहत।
रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट — भरोसे की सरकारी मुहर
जब रेरा किसी प्रोजेक्ट को मंज़ूरी देता है, तो वह एक प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करता है। इसे ऐसे समझिए जैसे गाड़ी खरीदने के बाद मिलने वाला RC (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट)। इस सर्टिफिकेट में लिखा होता है – रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर, प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा, रजिस्ट्रेशन कितने समय के लिए वैध है और रेरा प्रोजेक्ट बैंक खातों का विवरण वगैरह । यही दस्तावेज़ खरीदार को भरोसा देता है कि यह प्रोजेक्ट सरकार की नज़र में है।
हर प्रोजेक्ट की एक तय उम्र — अब अंतहीन देरी नहीं
पहले प्रोजेक्ट सालों तक चलते रहते थे “अगले साल देंगे”अगले महीने देंगे”धारा 5 ने इस पर ब्रेक लगाया।
अब हर प्रोजेक्ट की एक तय वैधता अवधि होती है। बिल्डर को उसी समय के अंदर निर्माण पूरा करना होता है।
यह नियम खरीदार को अनंत इंतज़ार से बचाता है।
सारी जानकारी अब छुपी नहीं रहती
रेरा रजिस्ट्रेशन के बाद प्रोजेक्ट की जानकारी, निर्माण की प्रगति, समय-सीमा, सब कुछ रेरा की वेबसाइट पर डाला जाता है। अब खरीदार को बार-बार साइट ऑफिस जाने की ज़रूरत नहीं। मोबाइल पर ही सच दिखाई देता है।
अगर बिल्डर ने ग़लत जानकारी दी तो?
मान लीजिए किसी ने नौकरी के लिए झूठा रिज़्यूमे दे दिया। अगर सच पकड़ा गया— नौकरी जा सकती है। रेरा में भी यही नियम है। अगर बिल्डर ग़लत जानकारी देता है, नियमों का उल्लंघन करता है तो रेरा उसके प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द या निलंबित कर सकता है। यह डर बिल्डर को ईमानदार बनाए रखता है।
धारा 5 का असली मतलब — सिर्फ बिल्डर नहीं, सिस्टम भी जवाबदेह
धारा 5 यह सुनिश्चित करती है कि रेरा अथॉरिटी समय पर काम करे, खरीदार को स्पष्ट जानकारी मिले, प्रोजेक्ट सीमित समय में पूरा हो, सिस्टम पारदर्शी बने । सीधे शब्दों में रेरा सिर्फ कानून नहीं, भरोसे की व्यवस्था है।
इस साप्ताहिक श्रृंखला की तृतीय किस्त यहीं समाप्त होती है। अगली किस्त में हम जानेंगे— अगर रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाए तो खरीदार के अधिकार क्या हैं?
धन्यावाद ।
आपका साथी,
Vishamber Shokeen
(विशम्बर शौकीन)
कंपनी सचिव एवं रेरा सलाहकार
9811937212
नमस्कार दोस्तों,
पिछली कड़ी में हमने जाना कि धारा 4 कैसे किसी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को शुरू होने से पहले ही “कानूनी और पारदर्शी”बनाती है।आज की कड़ी में एक बहुत ही आम लेकिन ज़रूरी सवाल का जवाब ढूँढते हैं :-
– बिल्डर ने रेरा में पंजीकरण के लिए आवेदन तो कर दिया, अब आगे क्या?
– क्या कोई देखता भी है कि काग़ज़ सही हैं या नहीं?
इसका सीधा और साफ़ जवाब है— रेरा की धारा 5।
आम ज़िंदगी का उदाहरण समझिए। मान लीजिए आपने अपने बच्चे का दाख़िला किसी अच्छे स्कूल में करवाने के लिए आवेदन किया। आप फ़ॉर्म भर देते हैं, फीस जमा कर देते हैं। अब क्या स्कूल मनमाने ढंग से महीनों तक चुप रह सकता है? नहीं। स्कूल को एक तय समय में यह बताना होता है कि दाख़िला हुआ या नहीं और अगर नहीं हुआ, तो कारण क्या है? रेरा की धारा 5 भी बिल्कुल यही काम करती है।
धारा 5 क्या कहती है?
धारा 5 कहती है कि जब कोई बिल्डर रेरा में प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करता है, तो रेरा अथॉरिटी को 30 दिनों के भीतर यह तय करना होगा कि प्रोजेक्ट मंज़ूर होगा या नामंज़ूर। यानी फ़ाइलें दफ़्तरों में लटकती नहीं रहेंगी। 30 दिन का नियम क्यों इतना ज़रूरी है? पहले क्या होता था? बिल्डर कहता था— परियोजना का निर्माण शुरू करने के लिए विशेष मंजूरी के लिए फाइल लंबित है। खरीदार सोचता था कहीं प्रोजेक्ट फँस तो नहीं गया? अब रेरा ने साफ़ कर दिया 30 दिन के अंदर फैसला ज़रूरी है। अगर रेरा 30 दिन में कोई जवाब नहीं देता, तो कानून मान लेता है कि प्रोजेक्ट रजिस्टर हो गया है। इसे कहते हैं— खरीदार और बिल्डर दोनों के लिए मानसिक राहत।
रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट — भरोसे की सरकारी मुहर
जब रेरा किसी प्रोजेक्ट को मंज़ूरी देता है, तो वह एक प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करता है। इसे ऐसे समझिए जैसे गाड़ी खरीदने के बाद मिलने वाला RC (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट)। इस सर्टिफिकेट में लिखा होता है – रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर, प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा, रजिस्ट्रेशन कितने समय के लिए वैध है और रेरा प्रोजेक्ट बैंक खातों का विवरण वगैरह । यही दस्तावेज़ खरीदार को भरोसा देता है कि यह प्रोजेक्ट सरकार की नज़र में है।
हर प्रोजेक्ट की एक तय उम्र — अब अंतहीन देरी नहीं
पहले प्रोजेक्ट सालों तक चलते रहते थे “अगले साल देंगे”अगले महीने देंगे”धारा 5 ने इस पर ब्रेक लगाया।
अब हर प्रोजेक्ट की एक तय वैधता अवधि होती है। बिल्डर को उसी समय के अंदर निर्माण पूरा करना होता है।
यह नियम खरीदार को अनंत इंतज़ार से बचाता है।
सारी जानकारी अब छुपी नहीं रहती
रेरा रजिस्ट्रेशन के बाद प्रोजेक्ट की जानकारी, निर्माण की प्रगति, समय-सीमा, सब कुछ रेरा की वेबसाइट पर डाला जाता है। अब खरीदार को बार-बार साइट ऑफिस जाने की ज़रूरत नहीं। मोबाइल पर ही सच दिखाई देता है।
अगर बिल्डर ने ग़लत जानकारी दी तो?
मान लीजिए किसी ने नौकरी के लिए झूठा रिज़्यूमे दे दिया। अगर सच पकड़ा गया— नौकरी जा सकती है। रेरा में भी यही नियम है। अगर बिल्डर ग़लत जानकारी देता है, नियमों का उल्लंघन करता है तो रेरा उसके प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द या निलंबित कर सकता है। यह डर बिल्डर को ईमानदार बनाए रखता है।
धारा 5 का असली मतलब — सिर्फ बिल्डर नहीं, सिस्टम भी जवाबदेह
धारा 5 यह सुनिश्चित करती है कि रेरा अथॉरिटी समय पर काम करे, खरीदार को स्पष्ट जानकारी मिले, प्रोजेक्ट सीमित समय में पूरा हो, सिस्टम पारदर्शी बने । सीधे शब्दों में रेरा सिर्फ कानून नहीं, भरोसे की व्यवस्था है।
इस साप्ताहिक श्रृंखला की तृतीय किस्त यहीं समाप्त होती है। अगली किस्त में हम जानेंगे— अगर रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाए तो खरीदार के अधिकार क्या हैं?
धन्यावाद ।
आपका साथी,
Vishamber Shokeen
(विशम्बर शौकीन)
कंपनी सचिव एवं रेरा सलाहकार
9811937212



