
हमारी पिछली कड़ी में आपने जाना कि RERA क्यों लाया गया और यह कैसे घर खरीदारों को भरोसा और सुरक्षा देता है। आज RERA दृष्टि की दूसरी किस्त में हम समझेंगे धारा 4, जो किसी भी रियल एस्टेट परियोजना के पंजीकरण की रीढ़ है।
कल्पना कीजिए आपने अपनी जिंदगी की सबसे कीमती कमाई एक घर में लगाई है। दिमाग में एक ही सपना – अपना घर। लेकिन सबसे बड़ा डर यह है कि— क्या यह प्रोजेक्ट सही है? क्या बिल्डर भरोसेमंद है? क्या पैसा सही जगह लग रहा है? क्या घर समय पर मिलेगा? इन सारे सवालों का एक ही जवाब है— रेरा (RERA) की धारा 4 जो हर घर खरीदार को स्वर्ग जैसा भरोसा देती है।
धारा 4 यह सुनिश्चित करती है कि परियोजना शुरू होने से पहले सारी जानकारी सार्वजनिक हो, खरीदार का पैसा सुरक्षित रहे, और बिल्डर पूरी पारदर्शिता के साथ काम करे। धारा 4 मतलब घर खरीदारों के लिए सुरक्षा, पारदर्शिता और विश्वास की मजबूत नींव ।
आइए इस धारा को उसी सरल भाषा में समझते हैं, जैसे कोई दोस्त आपको समझा रहा हो।
1. क्या है धारा 4? — वह दरवाज़ा जो सुरक्षा की शुरुआत करता है
रेरा कहता है कि अगर कोई बिल्डर कोई प्रोजेक्ट बनाएगा, तो पहले हमें बताना होगा कि वह क्या बना रहा है, कैसे बना रहा है और किसके पैसे से बना रहा है। यानि धारा 4 वह पहला सुरक्षा द्वार है, जहाँ से खरीदार का भरोसा शुरू होता है।
2. प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन
पहले के समय में बिल्डर मनमाने ढंग से प्रोजेक्ट शुरू कर देते थे। अब रेरा ने कहा पहले रजिस्ट्रेशन, फिर निर्माण। इससे दो फायदे हुए – फर्जी परियोजनाएँ खत्म और खरीदार का पैसा सुरक्षित ।
3. प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन के समय बिल्डर को क्या-क्या बताना पड़ता है? (4(2))
आप सोचिए कि कोई आपका पैसा ले रहा है, तो आपको सब कुछ जानना चाहिए, है ना? धारा 4 यही सुनिश्चित करती है। यह धारा कहती है कि बिल्डर अपनी पूरी कहानी खरीदारों के सामने रखेगा। आइए इसे संक्षिप्त अध्याय वार में समझते हैं—
अध्याय 1: बिल्डर कौन है? (4(2)(a))
जैसे किसी शादी में लड़का/लड़की का बैकग्राउंड देखा जाता है, वैसे ही रेरा कहता है कि बिल्डर का नाम, पता, व्यवसाय का प्रकार, कंपनी का विवरण और तस्वीर…सब बताओ! इसके द्वारा खरीदार को पता लगता है कि कौन बना रहा है और उसका रिकॉर्ड कैसा है।
अध्याय 2: पिछले 5 सालों का सच (4(2)(b))
ये सबसे दिलचस्प हिस्सा है। बिल्डर को बताना पड़ता है कि कौन-कौन सी परियोजनाएँ बनाई ; समय पर पूरी की या नहीं; देरी क्यों हुई; कितने मुकदमे चल रहे हैं; कितने पेमेंट्स लंबित हैं। अगर सरल भाषा में कहें तो खरीदार को पहले से पता रहता है कि वह एक अच्छे बिल्डर से खरीद रहा है या किसी विलंब राजा से।
अध्याय 3: क्या परियोजना कानूनी है? (4(2)(c)(d))
बिल्डर को सभी मंजूरियाँ दिखानी पड़ती हैं, जैसे कि कमेंसमेंट सर्टिफिकेट, नक्शा पास, सैंक्शन प्लान, लेआउट प्लान और संरचनात्मक डिज़ाइन। मतलब अब कोई अनोखी गली में बना बिना मंजूरी वाला प्रोजेक्ट बेच नहीं सकता! सब कुछ लीगल और साफ़ होना चाहिए।
अध्याय 4: सुविधाएँ क्या मिलेंगी? (4(2)(e))
जैसे कोई होटल अपना मेनू दिखाता है, वैसे ही बिल्डर को बताना पड़ता है कि प्रोजेक्ट में क्या सेवाएँ और सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं जैसे पानी, बिजली, फायर सिस्टम, सीवरेज, रिन्यूएबल ऊर्जा और पार्किंग वगैरह । जो वादा किया है, वही मिलेगा। बाद में बिल्डर बहाने कि ये तो प्लान में था ही नहीं वाली चाल चल नहीं सकती।
अध्याय 5: जमीन कहाँ है? (4(2)(f))
यह सबसे व्यवहारिक सुरक्षा है। बिल्डर को जमीन की GPS लोकेशन अक्षांश ( लैटिट्यूड) और देशांतर (लॉन्गिट्यूड) के साथ देनी होती है। कोई भी व्यक्ति अक्षांश और देशांतर की सहायता से परियोजना भूमि का स्थान देख सकता है। अब नक्शे पर एक जमीन दिखाकर दूसरी जमीन पर निर्माण करने की गुंजाइश शून्य!
अध्याय 6: आपको कौन-सा फ्लैट मिलेगा? (4(2)(h))
रेरा ने स्पष्ट कहा कि कार्पेट एरिया (Carpet Area) ही असली एरिया है।”अब बिल्डर कार्पेट एरिया, बालकनी एरिया, ओपन टैरेस एरिया, फ्लैट की संख्या और प्रकार सब कुछ बताएगा। अब हम कह सकते हैं कि सुपर एरिया के नाम पर धांधली खत्म।
अध्याय 7: सबसे बड़ा सुरक्षा कवच – 70% पैसा अलग बैंक खाते में (4(2)(l)(D))
यह धारा खरीदारों के लिए स्वर्ग जैसा सुरक्षा कवच है। पहली बार कानून ने स्पष्ट किया कि बिल्डर खरीदार से मिला 70% पैसा एक अलग बैंक खाते में ही रखेगा। यह पैसा सिर्फ उसी प्रोजेक्ट पर खर्च किया जा सकता है। और सबसे ज़रूरी चीज़ हर निकासी इंजीनियर, आर्किटेक्ट और CA के प्रमाणपत्र के बाद ही होगी। हम सरल भाषा में कह सकते हैं कि अब आपका पैसा आपके ही घर पर लगेगा, किसी और प्रोजेक्ट में नहीं जाएगा।
अध्याय 8: समय-सीमा तय करना अनिवार्य (4(2)(l)(C))
बिल्डर को बताना पड़ता है कि प्रोजेक्ट कब पूरा होगा। अब यदि बिल्डर तय समय पर घर पूरा नहीं करता, तो उसे खरीदार को ब्याज देना होगा या खरीदार की पूरी रकम वापस करनी पड़ेगी (धारा 18 के तहत)। यह नियम खरीदार को न सिर्फ आर्थिक बल्कि मानसिक और भावनात्मक राहत भी देता है।
अध्याय 9: जमीन का साफ़ और विवाद-रहित स्वामित्व (4(2)(l)(A)(B))
बिल्डर को शपथपत्र देना होता है कि जमीन उसकी है, अगर नहीं है, तो प्रमाणित एग्रीमेंट है। जमीन पर कोई विवाद नहीं है और अगर है, तो पूरा विवरण। खरीददार को भविष्य में किसी भी “जमीन विवाद” का खतरा नहीं रहता।
अध्याय 10: नियुक्त पेशेवरों की जानकारी (4(2)(k))
बिल्डर को यह बताना होता है कि— प्रोजेक्ट इंजीनियर कौन है, आर्किटेक्ट कौन है, ठेकेदार कौन है। यानी अब निर्माण गुणवत्ता की जिम्मेदारी तय कर दी गई है ।
धारा 4 का सार – खरीदार का स्वर्ग निर्मित
धारा 4 यह सुनिश्चित करती है कि— परियोजना पूरी तरह कानूनी हो, सारी जानकारी सार्वजनिक हो, पैसा सुरक्षित हो, समयसीमा तय हो, किसी भी बदलाव पर रोक हो, पेशेवरों की जवाबदेही तय हो, खरीदार को धोखा देने की गुंजाइश न बचे । यह धारा रेरा का दिल है और घर खरीदार की सुरक्षा की नींव।
इस साप्ताहिक श्रृंखला की द्वितीय किस्त यहीं समाप्त होती है। अगली किस्त में कानून की एक और महत्वपूर्ण परत खोलेंगे।
आपका साथी,
Vishamber Shokeen
(विशम्बर शौकीन)
कंपनी सचिव एवं रेरा सलाहकार
9811937212



