
कलाई पर बाँधी एक डोरी, पर इसमें छुपी है प्रेम की पूरी बोरी। ना सोना, ना चाँदी, ना कोई गहना, इसमें बस होता है भाई-बहन का गहरा अपनापन रहना।
कलाई पर बाँधी एक डोरी, पर इसमें छुपी है प्रेम की पूरी बोरी। ना सोना, ना चाँदी, ना कोई गहना, इसमें बस होता है भाई-बहन का गहरा अपनापन रहना।
रक्षाबंधन की डोरी
कलाई पर बाँधी एक डोरी,
पर इसमें छुपी है प्रेम की पूरी बोरी।
ना सोना, ना चाँदी, ना कोई गहना,
इसमें बस होता है भाई-बहन का गहरा अपनापन रहना।

राखी की यह नन्हीं सी रेखा,
बांध देती है दिलों को एक अनोखे नेह से देखा।
जब बहन मुस्कुराकर कलाई पर बाँधती है धागा,
तो भाई का हृदय गर्व से भर जाता है भागा।
बचपन की वो प्यारी कहानियाँ,
कभी लड़ाई, कभी मिठास, कभी मनुहार की रवानियाँ।
एक टॉफी के लिए लड़ना, फिर साथ बैठकर खाना,
आज यादें ही हैं, जो रह-रहकर दिल को हैं छू जाना।
बहन की मुस्कान में छिपा आशीर्वाद,
भाई की निगाहों में होता रक्षा का व्रत-संवाद।
हर रक्षाबंधन पर होता है यह नया नाता,
पुराने रिश्तों को फिर से जीने का प्यारा बहाना।
माँ की थाली, दीपक की लौ,
चावल, रोली, मिठाई की होड़।
बहन का गीत, और भाई का प्रण,
“जब तक साँस, तेरी रक्षा का करूँ वचन।”
पर समय के संग रिश्ते बदल जाते हैं,
कुछ भाई दूर शहरों में बस जाते हैं।
कुछ बहनें फोन पर ही राखी मनाती हैं,
पर भाव वही रहते हैं, जो आँखें बताती हैं।
राखी अब डाक से आती है,
या वीडियो कॉल पर बहन मुस्कुराती है।
किंतु भावना की डोर कभी नहीं टूटती,
रिश्तों की मिठास यूँ ही हमेशा छूटती।
कभी बहन बनी माँ का साया,
तो कभी भाई ने दुखों से बचाया।
कभी बहन ने दी प्रेरणा बनकर दीप,
तो कभी भाई ने खड़ी की बहन की जीत की सीढ़ी सीप।
हे रक्षाबंधन, तू केवल त्योहार नहीं,
तू रिश्तों की रचना है, एक संस्कार सही।
तेरे माध्यम से हर दिल को जोड़ते हैं,
भाई-बहन संग, मानवता का भी नाता जोड़ते हैं।
चलो आज फिर से ये संकल्प लें,
सिर्फ धागा नहीं, भावनाओं का बंधन दें।
भाई बहन बनकर हर जीवन में प्रेम बोएँ,
रक्षाबंधन के पर्व को केवल रस्म न समझें — इसे जीवन में रोज़ निभाएँ।
🙏 रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏
अनिल माथुर
जोधपुर (राजस्थान)


