
आज का विषय : नेतृत्व: अधिकार नहीं, जिम्मेदारी की पहचान
नेतृत्व: अधिकार नहीं, जिम्मेदारी की पहचान
नेतृत्व केवल एक पद, कुर्सी या अधिकार का नाम नहीं है। यह एक दृष्टिकोण है, एक कर्तव्य है और सबसे बढ़कर वह कला है जिसमें व्यक्ति स्वयं आगे बढ़कर दूसरों को भी आगे ले जाने की शक्ति रखता है। वास्तव में नेता वह नहीं जो केवल आदेश दे, बल्कि वह है जो प्रेरणा का स्त्रोत बने, दिशा दिखाए, कठिन परिस्थितियों में ढाल की तरह खड़ा रहे और अपनी टीम के लिए अवसरों के द्वार खोले। एक विद्वान ने कहा है—
“एक नेता तब सबसे उत्तम होता है, जब लोग उसके अस्तित्व को मुश्किल से जानते हैं।
जब उसका कार्य पूर्ण हो जाता है, उद्देश्य सफल होता है, तो लोग कहते हैं— यह हमने किया है।”
इस कथन का अर्थ यही है कि सच्चा नेता श्रेय स्वयं नहीं लेता, बल्कि अपनी टीम को आगे रखकर, उनके साथ कदम मिलाकर चलता है। सफलता का ताज वह बांटता है, और असफलता का बोझ स्वयं उठाता है। नेतृत्व का सार इसी विनम्रता और दायित्वबोध में छिपा है।
नीचे कुछ प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से नेतृत्व की जिम्मेदारियों को और स्पष्ट रूप में समझा जा सकता है:—
1 . टीम के विकास की जिम्मेदारी
एक सफल नेता का उद्देश्य केवल स्वयं का उत्थान नहीं होता, बल्कि टीम में कार्यरत प्रत्येक सदस्य के कौशल, आत्मविश्वास और दृष्टिकोण का विकास भी उसका कर्तव्य है। वह सीखने के अवसर पैदा करता है, संवाद के माध्यम से अनुभव साझा करता है और टीम को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। यदि पूरी टीम आगे बढ़ती है, तभी संगठन प्रगति करता है।
2. प्रेरणा एवं प्रोत्साहन देना
नेतृत्व का असली स्वरूप प्रेरणा में निहित है। नेता का व्यवहार, कार्यशैली तथा निष्ठा स्वयं ही प्रेरणा का माध्यम बनते हैं। एक अच्छा नेता अपनी टीम का मनोबल ऊंचा रखता है, उन्हें चुनौतियों से लड़ने का अभ्यास कराता है और हर पल यह विश्वास जगाता है कि वे और बेहतर कर सकते हैं।
3. नए अवसर प्रदान करना
टीम को नए अवसर और जिम्मेदारियां सौंपना नेतृत्व का महत्वपूर्ण पहलू है। अवसर ही व्यक्ति को निखारते हैं, नई जिम्मेदारियां ही क्षमता का विस्तार करती हैं। जो नेता केवल स्वयं कार्य करता है, वह अकेले आगे बढ़ता है। परंतु जो नेता अवसर बांटता है, वह अपनी पूरी टीम को आगे बढ़ाता है।
4 . उचित मार्गदर्शन एवं सलाह
एक अच्छा नेता केवल आदेश नहीं देता, बल्कि मार्गदर्शक बनकर साथ चलता है। वह टीम के सदस्यों को व्यक्तिगत और व्यावसायिक स्तर पर बेहतर बनने, सीखने और निर्णय लेने में सहायता करता है। मार्गदर्शन वह दीपक है जो अनिश्चितता के अंधकार में राह दिखाता है।
5. निर्णायक क्षमता और समयबद्ध निर्णय
नेतृत्व का मूल सार संकट की घड़ी में प्रकट होता है। कठिनाई हो या दबाव, नेता को विवेकपूर्ण और समय पर निर्णय लेना आवश्यक है। देर से लिया निर्णय कई बार अवसर खो सकता है, इसलिए नेतृत्व दूरदर्शिता, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी का संतुलन मांगता है।
6 . सामूहिक हित को प्राथमिकता देना
एक सच्चा नेता व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर समूह के हित को सर्वोपरि रखता है। चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, उसे अपनी टीम के साथ खड़े रहना चाहिए। एकता केवल शब्द नहीं, बल्कि आचरण से सिद्ध होती है।
7. पारदर्शिता और विश्वास
नेता और टीम के बीच विश्वास तभी बनता है जब निर्णय लेने की प्रक्रिया पारदर्शी हो। खुलापन, स्पष्ट संवाद और निष्पक्षता नेतृत्व की नींव हैं। विश्वास वह सेतु है जिस पर व्यवस्थाएँ टिकती हैं और संबंध मजबूत होते हैं।
8. परिणाम की जवाबदेही
सच्चे नेता की पहचान यह है कि वह सफलता और असफलता दोनों की जिम्मेदारी स्वीकार करता है। गलती होने पर दूसरों पर दोषारोपण नहीं करता, बल्कि त्रुटि के कारणों को समझकर सुधार की दिशा में कदम उठाता है।
नेता वही, जो सफलता का श्रेय बांटे और कमी की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले।
9. अधिकार और जिम्मेदारी का संतुलन
अधिकार के साथ जिम्मेदारी स्वतः जुड़ी होती है। नेता आदेश दे सकता है, लेकिन उसके परिणाम की जवाबदेही भी उसी पर होती है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था—
“नेतृत्व करते हुए सेवक बनो। निःस्वार्थ बनो। असीम धैर्य रखो, और सफलता तुम्हारी होगी।”
यह वाक्य नेतृत्व की आत्मा को संक्षेप में प्रकट करता है।
अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि नेतृत्व और जिम्मेदारी एक-दूसरे के पूरक हैं। नेतृत्व सत्ता नहीं, सेवा है; नेतृत्व अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व है। जब नेता अपनी टीम के कार्यों की पूरी जिम्मेदारी लेता है, तभी वह विश्वसनीय, प्रभावशाली और प्रेरणादायी बनता है।
इसलिए कहा जाता है—
नेता पैदा नहीं होते, जिम्मेदारी को स्वीकार कर बनते हैं।
और जब जिम्मेदारी हृदय से निभाई जाए, तब नेतृत्व स्वयं चमक उठता है।
जय हिन्द।
लेखक :
वी. शौकीन
कंपनी सचिव एवं रेरा सलाहकार
9811937212


