बेगूसराय

तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव के समापन समारोह के अवसर पर नाट्य संस्था “रिवाइवल” की प्रस्तुति विपद ढ़ोलकिया।

तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव के समापन समारोह के अवसर पर नाट्य संस्था "रिवाइवल" की प्रस्तुति विपद ढ़ोलकिया।

तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव के समापन समारोह के अवसर पर नाट्य संस्था “रिवाइवल” की प्रस्तुति विपद ढ़ोलकिया।


अशोक पासवान राज्य प्रमुख आपकी आवाज।

जिले की चर्चित नाट्य संस्था “रिवाइवल” बेगूसराय द्वारा नाटक- “विपद ढोलकिया” मूल कहानी फणीश्वर नाथ रेणु,नाट्य रूपांतरण व निर्देशन कुमार अभिजीत का शानदार प्रदर्शन पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र,कोलकाता व आकाश गंगा रंग चौपाल एसोसियेशन,बीहट के द्वारा आयोजित 3 दिवसीय नाट्य महोत्सव (2फरवरी 4फरवरी2026) में समापन के अवसर पर मध्य विद्यालय, बीहट,बेगुसराय के मंच पर किया गया नाटक विपद ढोलकिया में लोक कलाओं के संरक्षण व्यवस्था परिवर्तन एवं हमारे सामाजिक सांस्कृतिक नैतिक मूल्यों पर पड़ने वाले प्रभाव को रेखांकित करती है वही नाटक विपरीत परिस्थितियों में भी खुद को संभालने समझने एवं साहस के साथ कर्मठता से जीवन जीने का संदेश देती है आज के दौर में लोग जिस तरह आधुनिकता की तरफ भाग रहे हैं उससे हमारा पुरातन वैभव संस्कृति कला और कलाकार छूटते चले जा रहे हैं उन्हें बस मंच और किताबों तक समेट कर रख दिया गया है किंतु विपद ढोलकिया नाटक आधुनिक वैभव शोहरत दिखावे से ज्यादा काम और चरित्र को महत्व देता है। ढोलक की आवाज जीवन और मृत्यु के संघर्ष में लोगों को जीने की प्रेरणा देती है ।नाटक पुरानी परंपराएं और कलाकार के उपेक्षा के दर्द को उभरने की कोशिश करती है। नाटक विपद ढोलकिया जीवन के संघर्षों से जूझते लोक कलाकारों के माध्यम से समाज को कला संस्कृति और मानवीय मूल्यों के प्रति अति संवेदनशील व जागृत करने की कोशिश करती है नाटक के निर्देशक व अभिनेता लुट्टन पहलवान की भूमिका में कुमार अभिजीत की ढोलक अंधेरे महामारी और विपरीत समय में ग्रामीणों को जीने की प्रेरणा देती है किन्तु अंततः व्यवस्था के बदलते ही वह आप्रासंगिक होकर मिट जाती है। यह नाटक कलाकार के संरक्षण व संवर्धन की वकालत करती है क्योंकि आज भी लुट्टन सिंह जैसे हजारों लोक कलाकार व्यवस्था से हार कर भूख प्यास और परिवार के लिए कलाकारी और कला को छोड़कर मजदूर बनने को विवश है पेट की भूख बीमारी और इलाज की चिंता उन्हें मारती और खत्म करती जा रही है कुल मिलाकर यह नाटक बदलते समय में कलाकारों की स्थिति पर एक मार्मिक वेदना प्रस्तुत करती है,लुट्टन की भूमिका में कुमार अभिजीत ने दर्शकों को रोमांचित किया लुट्टन की पत्नी के रूप में रजनी कुमारी,लुट्टन के बेटे की भूमिका में अनिकेत सुलभ व मिहिर मानस ने दर्शकों की तालियां बटोरी राजा की भूमिका में मनीष कुमार,चाँद सिंह की भूमिका में दीपक कुमार, मुंशी की भूमिका में नीरज कुमार कवि की भूमिका में दीपक कुमार ने काफी प्रभावित किया,ढोलक पे नंदू कुमार, साउंड-चंदन कुमार,लाइट-मनोज कुमार,मेकअप-अमृता कुमारी का था, कुलमिलाकर दर्शकों को एक शानदार और सशक्त प्रस्तुति का आंनद प्राप्त हुआ ।।

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