
आखिर, क्या होगा!

कांप रही धरती
देखते हुए
चारों तरफ की
भरे हुए प्रदूषण का ग्राफ
धूल एवं गंदिगी भी
चिमनी से निकले धुएँ
जलाये जाते हैं बड़े -बड़े खलिहनो में
अपने जीवन
जीवन-जगत से
लापरवाह मानव
विनाश-लीला को
बुलवा भेज
इतरा रहा है।
होकर
पूरा खामोश!हाँ, पूरा खामोश!!
***
डॉ रणजीत कुमार दिनकर
एस. आर. ए. पी. कॉलेज, बरा चकिया, पूर्वी चम्पारण, विहार



