
पंडित अजय झा के नेतृत्व में UGC बिल 2026 के खिलाफ सवर्ण समाज का एलान-ए-जंग
पंडित अजय झा के नेतृत्व में UGC बिल 2026 के खिलाफ सवर्ण समाज का एलान-ए-जंग
पंडित अजय झा के नेतृत्व में UGC बिल 2026 के खिलाफ सवर्ण समाज का एलान-ए-जंग
धरना स्थल से गूंजा सवाल— शिक्षा सुधार या सामाजिक संतुलन पर सुनियोजित हमला?
अररिया I

UGC बिल 2026 के खिलाफ सवर्ण समाज का आक्रोश अब सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है। रविवार, 01 फरवरी 2026 को अनुमंडल मुख्यालय स्थित धरना स्थल पर पंडित अजय झा के नेतृत्व में एक दिवसीय शांतिपूर्ण लेकिन आक्रामक तेवर वाला धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। जिला भर के गांवों से पहुंचे समाज के लोगों ने भारी संख्या में भाग लेकर यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि यह लड़ाई अब चुपचाप सहने की नहीं है।
कार्यक्रम की संयोजकता परशुराम परिषद के राष्ट्रीय संयोजक सह पूर्व विधानसभा प्रत्याशी पंडित अजय झा ने की। उनकी अध्यक्षता में आयोजित यह धरना केवल औपचारिक विरोध नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की शिक्षा नीति पर सीधा सवाल था।
धरना स्थल “UGC काला कानून वापस लो” और “सवर्ण एकता जिंदाबाद” जैसे नारों से गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि UGC बिल 2026 शिक्षा सुधार के नाम पर शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया से लेकर शैक्षणिक स्वायत्तता तक को कमजोर करने की साजिश है।
वक्ताओं ने दो टूक कहा कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय समाज में असंतुलन और असमानता को बढ़ावा देने वाला है। उनका कहना था कि केंद्र सरकार बिना व्यापक विमर्श के ऐसा कानून थोपकर न केवल शिक्षकों बल्कि पूरे समाज के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है।
धरना को संबोधित करते हुए पंडित अजय झा ने कहा कि
“यह बिल शिक्षा सुधार नहीं, बल्कि शिक्षा नियंत्रण का दस्तावेज़ है। यदि सरकार इसे वापस नहीं लेती, तो आंदोलन सड़क से संसद तक जाएगा।”
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक इस तथाकथित काले कानून को रद्द नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन लगातार तेज किया जाएगा। धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, हालांकि संदेश साफ और तीखा था। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर यह साफ कर दिया कि अब यह मामला केवल नीति का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और शैक्षणिक भविष्य का बन चुका है।
यह धरना एक संकेत है— यदि शिक्षा पर प्रयोग जारी रहा, तो विरोध और भी उग्र होगा।



