
धरती वंदन वर्ल्ड रिकॉर्ड-6, 12 घंटे में 99 रचनाकारों ने 150 कविताओं से दिया प्रकृति संरक्षण का वैश्विक संदेश
धरती वंदन वर्ल्ड रिकॉर्ड-6, 12 घंटे में 99 रचनाकारों ने 150 कविताओं से दिया प्रकृति संरक्षण का वैश्विक संदेश
धरती वंदन वर्ल्ड रिकॉर्ड-6, 12 घंटे में 99 रचनाकारों ने 150 कविताओं से दिया प्रकृति संरक्षण का वैश्विक संदेश

इंडोनेशिया में साहित्य और पर्यावरण चेतना का अनूठा अंतरराष्ट्रीय संगम
नई दिल्ली। धरती, प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदना को साहित्य के वैश्विक मंच से स्वर देने की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज हुई है। वन्देमातरम्–वसुधैव कुटुम्बकम की संस्थापिका इंदु नांदल ने ‘धरती वंदन वर्ल्ड रिकॉर्ड-6’ के अंतरराष्ट्रीय आयोजन 9 अगस्त 2026 का इंडोनेशिया से श्री गणेश किया ।
लगातार 12 घंटे—प्रातः 8:30 बजे से शाम 8:30 बजे तक—चले इस विशेष साहित्यिक आयोजन में 99 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रचनाकारों ने 150 कविताओं का काव्य पाठ किया। इन रचनाओं का केंद्र पेड़, पौधे, फूल और प्रकृति के प्रति मानवीय संवेदना रहा। इस आयोजन ने साहित्य को पर्यावरण संरक्षण और धरती के प्रति जिम्मेदारी के वैश्विक संदेश से जोड़ा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एच. ई. श्री रविशंकर गोयल, काउंसिल जनरल ऑफ इंडिया, मेदान, इंडोनेशिया की गरिमामयी उपस्थिति एवं प्रेरक उद्बोधन से हुआ। उन्होंने साहित्यकारों के इस प्रयास की सराहना करते हुए प्रकृति संरक्षण के प्रति सामूहिक चेतना को समय की आवश्यकता बताया। वर्ल्ड रिकॉर्ड की उपलब्धि पर उन्होंने सभी प्रतिभागियों, आयोजकों एवं सहयोगियों को शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
*इंदु नांदल के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय आयोजन*
इस ऐतिहासिक आयोजन का नेतृत्व इंडोनेशिया की विश्व रिकॉर्ड होल्डर इंदु नांदल ने किया। उनके नेतृत्व में भारत सहित विभिन्न देशों से जुड़े साहित्यकारों ने एक मंच पर आकर प्रकृति के प्रति अपनी रचनात्मक प्रतिबद्धता व्यक्त की।
वर्ल्ड रिकॉर्ड को सफल बनाने में दुबई से डॉ. अमृत बिसारिया, अमेरिका से मंजू श्रीवास्तव, कनाडा से साहिल नांदल तथा दुबई से ऋत्विक बिसारिया का महत्वपूर्ण सहयोग एवं मार्गदर्शन रहा।
*12 समूहों ने संभाली आयोजन की जिम्मेदारी*
इस विशाल अंतरराष्ट्रीय काव्य आयोजन को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए 12 समूहों का गठन किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बारह समूहों का संचालन विभिन्न देशों से जुड़े साहित्यकारों ने किया। इनमें डॉ. अमृत बिसारिया (दुबई), गिरीश गुप्ता (भारत), डॉ. सोनिया वशिष्ठ (इंडोनेशिया), संचिता दास, (आबूधाबी), प्राची गर्ग, (इंडोनेशिया), प्राची अग्रवाल (भारत), डॉ. पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ (भारत), डॉ. मोनिका रूसिया (भारत), मंजु श्रीवास्तव, (अमेरिका ), विनीता जायसवाल, (भारत), संगीता चौबे ‘पंखुड़ी’ (कुवेत ), तथा मंजु श्रीवास्तव, (भारत )शामिल रहे।
इन समूह संचालकों के कुशल समन्वय ने विभिन्न देशों से जुड़े रचनाकारों को एक मंच पर लाने और 12 घंटे के इस वृहद साहित्यिक आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
*विश्वभर से साहित्यकारों ने दी शुभकामनाएं*
इस उपलब्धि पर भारत से डॉ. पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’, श्रीमती सावित्री धायल, प्राची अग्रवाल, डॉ. ज्येश नारायण भानु, गिरीश गुप्ता, डॉ. रीमा सिन्हा एवं क्षिप्रा चतुर्वेदी सहित अनेक साहित्यकारों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आयोजकों और प्रतिभागियों को बधाई दी।
अमेरिका से डॉ. दुर्गा सिन्हा, सुमन श्रीवास्तव, मंजू श्रीवास्तव, उमा नाथ त्रिपाठी एवं रचना श्रीवास्तव, यूके से स्वर्ण तलवार, दुबई से डॉ. अमृत बिसारिया एवं ऋत्विक बिसारिया, कनाडा से साहिल नांदल एवं शिखा पोरवाल, सिंगापुर से अनुसूया साहू, इंडोनेशिया से संजीव नांदल एवं डॉ. सोनिया वशिष्ठ, नीदरलैंड से अश्विनी केगावकर , ताइवान से भावना श्रीवास्तव तथा नेपाल से मनीषा मेरु सहित विभिन्न देशों के साहित्यकारों एवं शुभचिंतकों ने भी इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
साहित्य के माध्यम से धरती के नाम वैश्विक संकल्प
धरती वंदन वर्ल्ड रिकॉर्ड-6 की विशेषता केवल विश्व रिकॉर्ड बनना नहीं, बल्कि साहित्य के माध्यम से प्रकृति के प्रति वैश्विक चेतना को स्वर देना है। 12 घंटे तक 99 रचनाकारों द्वारा प्रस्तुत 150 कविताओं ने यह संदेश दिया कि पेड़, पौधे और फूल मानव जीवन एवं पृथ्वी के अस्तित्व से गहराई से जुड़े हैं।
वन्देमातरम्–वसुधैव कुटुम्बकम की यह अंतरराष्ट्रीय पहल साहित्य को देशों की सीमाओं से आगे ले जाकर धरती के साझा सरोकार से जोड़ती है। धरती वंदन वर्ल्ड रिकॉर्ड-6 इस बात का प्रतीक बना कि जब साहित्य प्रकृति के पक्ष में आवाज उठाता है, तो वह केवल रचना नहीं रहता, बल्कि संरक्षण और संवेदना का वैश्विक संकल्प बन जाता है।



