बिहार

बैकुंठ शुक्ल जैसे महा मानव बिड़ले ही धरती पर आते है आज के पीढ़ी उनके जीवन से सीख लें – डॉ अरुण

बैकुंठ शुक्ल जैसे महा मानव बिड़ले ही धरती पर आते है आज के पीढ़ी उनके जीवन से सीख लें - डॉ अरुण

बैकुंठ शुक्ल जैसे महा मानव बिड़ले ही धरती पर आते है आज के पीढ़ी उनके जीवन से सीख लें – डॉ अरुण

पटना. युवा एकता मंच के तत्वावधान में बृहस्पतिवार को शहर के जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के सभागार हार्डिंग रोड में अमर शहीद बैकुंठ शुक्ल का 92 वां शहादत दिवस श्रद्धा के साथ मनाया गया। साथ ही उनके जीवनी पर आधारित पुस्तक “वैशाली के अनमोल लाल शहीद-ए-आजम बैकुंठ शुक्ल” नामक पुस्तक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व सांसद डॉ अरुण कुमार ने करते हुए कहा कि आज राष्ट्र के युवाओं को अपने पूर्वजों से सीख लेने की जरूरत है, जिन्होंने अपने देश के आजादी के लिए हंसते हंसते फांसी के फंदे को अपने गले से लगा कर शहादत दी। बैकुंठ शुक्ल जैसे आजादी के दीवाने मानव नहीं महामानव थे और उनके जैसे इस धरती पर विरले ही पैदा लेते है।इससे हमें सीख मिलती है। अमर शहीद बैकुंठ शुक्ल की जीवनी को स्कूली और कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल कर आज के पीढ़ी को बैकुंठ शुक्ल जैसे आजादी के इस महामानव को जानने की जरूरत है। डॉक्टर अरुण ने अमर शहीद बैकुंठ शुक्ल जैसे देश के शहीद को अब तक केंद्र व राज्य सरकार से जो सम्मान मिलना चाहिए था, वह सम्मान आज तक नहीं मिला है. इसके लिए संकल्प के साथ हम सबों को एक जुट होकर लड़ाई लड़ने की आवश्यकता है।कार्यक्रम की अध्यक्षता संजीत कुमार चौधरी ने की और मंच संचालन हंसराज भारद्वाज ने किया.

 

इस मौके पर पूर्व विधान परिषद सदस्य अजय अलमस्त जी ने अपने संबोधन में बैकुंठ शुक्ल को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि देश को गुलामी से चंगुल से निजात दिलाने के लिय जिन्होंने अपनी कुर्बानी दी है कि उसमें 28 वर्षीय बैकुंठ शुक्ल को देश कभी नहीं भूल सकता है। राष्ट्र के लिय फांसी की फंदे को चूमने वाले बैकुंठ शुक्ल सदियों तक याद आयेंगे।

 

समारोह में बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र मानपुरी ने कहा कि बैकुंठ शुक्ल जैसे राष्ट्र भक्त ने अपनी शहादत देकर आज के युवा पीढ़ी को जो संदेश दिया वह पीढ़ी दर पीढ़ी लोग याद करेंगे।

 

उन्होंने अपनी जिंदगी को मां भारती को समर्पित कर राष्ट्र को संदेश दिया था कि राष्ट्र को हमेशा स्वतंत्र रखने के लिय तैयार रहे। जो भी बाहरी शक्ति अपने देश की ओर आंख उठाए उसे नेस्तनाबूद करने के लिय अगर प्राणों की आहुति देना परे तो हिचके नहीं।

 

समारोह में युवा एकता मंच के अध्यक्ष और कार्यक्रम के अध्यक्षता कर रहे संजीत कुमार चौधरी ने एक प्रस्ताव रखा जिसमें शहीद बैकुंठ शुक्ल को भारत रत्न देने की मांग की गई और राजधानी में उनके आदमकद प्रतिमा की स्थापना करने और उनके नाम पर एक शोध संस्थान खोलने की मांग की गई। जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।

 

संचालन करते हुए हंसराज भारद्वाज ने कहा कि शहीदों का बलिदान ही राष्ट्र की असली पूंजी है। बैकुंठ शुक्ल जी ने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर देशभक्ति, साहस और त्याग की अमिट मिसाल प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को ऐसे महान क्रांतिकारियों के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है, जिन्होंने हंसते-हंसते देश के लिए फांसी का फंदा स्वीकार कर लिया। बैकुंठ शुक्ल जी का जीवन राष्ट्रसेवा, संघर्ष, त्याग और समर्पण का प्रतीक है।

 

इस अवसर पर शिव कुमार जी, शशि कुमार जी, विज्ञान स्वरूप सिंह, श्याम नारायण ठाकुर, बलराम मिश्रा, खुर्शीद अनवर, राजकिशोर सिन्हा, डॉ रजनीश कुमार ने भी बैकुंठ शुक्ल को अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की अपील आज के पीढ़ी से की।

 

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने शहीद बैकुंठ शुक्ल जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता एवं युवा उपस्थित रहे।

 

 

संजीत कुमार चौधरी

Join WhatsApp Channel Join Now
Subscribe and Follow on YouTube Subscribe
Follow on Facebook Follow
Follow on Instagram Follow
Download from Google Play Store Download

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button