बिहार एवं झारखंड

कुलपति बोले—“एनएसएस को बनाएं ‘वाइब्रेंट’ यही राष्ट्र निर्माण की असली धुरी”

कुलपति बोले—“एनएसएस को बनाएं ‘वाइब्रेंट’ यही राष्ट्र निर्माण की असली धुरी”

एनएसएस परामर्शदात्री समिति की बैठक में बड़े फैसले

कुलपति बोले—“एनएसएस को बनाएं ‘वाइब्रेंट’ यही राष्ट्र निर्माण की असली धुरी”

माय भारत पोर्टल पर अनिवार्य पंजीयन, उत्कृष्ट कार्य करने वालों को मिलेगा सम्मान—एनएसएस की नई रूपरेखा तैयार

मधेपुरा /डा. रूद्र किंकर वर्मा।

मधेपुरा विश्वविद्यालय में बुधवार को आयोजित एनएसएस परामर्शदात्री समिति की महत्वपूर्ण बैठक में संगठन को अधिक सक्रिय, प्रभावी और ‘वाइब्रेंट’ बनाने के लिए कई निर्णायक फैसले लिए गए। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो.(डा.) बी.एस. झा ने की।

कुलपति का स्पष्ट संदेश:

“65% युवा ताक़त—देश के नवनिर्माण की असल उम्मीद”

कुलपति ने कहा कि भारत की 65% जनसंख्या युवा है, इसलिए राष्ट्र-निर्माण की सर्वाधिक जिम्मेदारी इन्हीं पर है।
उन्होंने कहा— “एनएसएस का आदर्श वाक्य ‘मैं नहीं, बल्कि आप’ सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि आत्मसमर्पण और सेवा की संस्कृति है। हमें अपने एनएसएस को ‘वाइब्रेंट’ बनाना ही होगा, तभी युवा परिवर्तन का नेतृत्व कर पाएंगे।”

उन्होंने डिजिटल भारत, कौशल भारत और विकसित भारत जैसे अभियानों में एनएसएस की महती भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया।

ऐतिहासिक संदर्भों के साथ क्षेत्रीय निदेशक का संबोधन

क्षेत्रीय निदेशक विनय कुमार ने एनएसएस की पृष्ठभूमि पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि—

स्वतंत्रता के बाद डॉ. राधाकृष्णन आयोग ने राष्ट्रीय सेवा का सुझाव दिया

1969—महात्मा गांधी के 100वें जयंती वर्ष में एनएसएस की आधिकारिक शुरुआत

पहले 37 विश्वविद्यालय, 40 हज़ार स्वयंसेवक

आज 657 विश्वविद्यालयों तक विस्तार

कुल 39,87,781 स्वयंसेवक सक्रिय

उन्होंने कहा कि एनएसएस ने अपनी जमीनी कार्यशैली से समाज-निर्माण में असाधारण योगदान दिया है।

बैठक के प्रमुख निर्णय
🔷 1. माय भारत पोर्टल पर अनिवार्य पंजीयन

सभी महाविद्यालय, कार्यक्रम पदाधिकारी एवं स्वयंसेवकों का एक सप्ताह के भीतर पंजीयन अनिवार्य।
लापरवाही पर एनएसएस इकाई वापस लेने की कार्रवाई।

🔷 2. पूर्व स्वयंसेवकों का पूरा डेटाबेस

एनएसएस के विकास में Alumnis को जोड़ा जाएगा।

🔷 3. कार्यक्रम पदाधिकारियों को बड़ी सौगात

ओरिएंटेशन प्रोग्राम

अनुभव प्रमाण-पत्र

संतोषप्रद प्रदर्शन पर Pocket Allowance

🔷 4. स्वयंसेवकों को सम्मान

सभी को आई-कार्ड

विशेष शिविर का प्रमाण-पत्र

हर वर्ष 10 उत्कृष्ट स्वयंसेवकों का सम्मान

🔷 5. विश्वविद्यालय स्तरीय पुरस्कार

तीन श्रेष्ठ कार्यक्रम पदाधिकारी पुरस्कृत किए जाएंगे।

🔷 6. एनएसएस डे को विशेष आयोजन

हर वर्ष एनएसएस दीक्षांत समारोह
छमाही एनएसएस बुलेटिन प्रकाशित होगा।

🔷 7. अगले वित्त वर्ष (2026-27) के बजट का प्रारूप तैयार

संशोधित रूप में वित्त समिति को भेजा जाएगा।

कार्यक्रम की शुरुआत और समापन—सांस्कृतिक सौंदर्य के साथ

स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि
हस्तकरघा से बने अंगवस्त्रम् से स्वागत
राष्ट्रगान “जन गण मन” के सामूहिक गायन के साथ बैठक का समापन

इन प्रतिष्ठित शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही:

प्रो. कैलाश प्रसाद यादव, प्रो. नरेश कुमार, प्रो. एम. आई. रहमान, प्रो. सुधीर कुमार, डॉ. माधवेंद्र झा, प्रो. उषा सिन्हा,
कै. गौतम कुमार, सरवर मेहंदी, हुस्न जहाँ, डॉ. संजय कुमार, आनंद आशीष सहित अनेक पदाधिकारी एवं स्वयंसेवक मौजूद रहे।

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