दिल्ली एवं एनसीआर

धार्मिक आजादी प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार – अमरजीत पटेल*

धार्मिक आजादी प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार - अमरजीत पटेल*

धार्मिक आजादी प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार – अमरजीत पटेल

पिछड़ा वर्ग का 27 प्रतिशत आरक्षण बिल सरकार शीघ्र पारित करे – जय साहू

पिछड़ो व अल्पसंख्यको के मौलिक अधिकारो की अनदेखी दुर्भाग्यपूर्ण – अनिल मेश्राम

मूलनिवासी संघ एवं सामाजिक संगठनो का संयुक्त धरना-प्रदर्शन दुर्ग मे संपन्न हुआ
छत्तीसगढ़ मे धर्मांतरण के संबंध मे पारित धर्म विधेयक कानून के खिलाफ और पिछले तीन साल से राज्यपाल के पास लंबित पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण बिल शीघ्र लागू किये जाने की मांग को लेकर मूलनिवासी संघ के बैनर तले एससी एसटी ओबीसी अल्पसंख्यक वर्ग के सैकड़ो सदस्यो द्वारा मानस भवन दुर्ग मे धरना-प्रदर्शन कर रैली निकाली गई जो जिला कलेक्ट्रेट परिसर दुर्ग मे घेराव के बाद जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के साथ संपन्न हुई।

धरना-प्रदर्शन व रैली को संबोधित करते हुए मूलनिवासी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत पटेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ मे राज्य सरकार द्वारा धर्मांतरण पर धर्म विधेयक कानून पारित किया गया है जो कि छत्तीसगढ़ के नागरिको की धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रहार है। जिला अध्यक्ष जय साहू ने कहा कि पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का बिल छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के पास पिछले तीन साल से लंबित पड़ा है जिसे पिछड़ा वर्ग के हित मे त्वरित रुप से लागू किया जाना चाहिए। अखिल भारतीय एससी एसटी ओबीसी संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव अनिल मेश्राम ने कहा कि डा.बाबासाहेब भीमराव आम्बेडकर द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 मे भारत के प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की गई है जिसके अनुसार कोई भी नागरिक अपनी पसंद के अनुरूप स्वेच्छापूर्वक धर्म परिवर्तन कर सकता है इसलिए धर्मांतरण के खिलाफ धर्म विधेयक कानून पारित कराना संविधान की अवमानना है, हालांकि किसी की कमजोर परिस्थिति का फायदा उठाकर प्रलोभन या दबाव देकर धर्मांतरित कराया जाना भी असंवैधानिक कृत्य है। पास्टर बी. स्वामीनादुलु ने धर्म विधेयक को काला कानून बताते हुए इसे इसाई व मुस्लिम समुदाय के खिलाफ साजिश करार दिया और इसे सरकार से वापस लेने की पुरजोर मांग की। संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कौशल वर्मा ने संविधान के अनुच्छेद 340 मे प्रावधानित पिछड़ा वर्ग के आरक्षण बिल को लागू ना कराये जाने को छत्तीसगढ़ सरकार की नीयत मे खोट बताते हुए धार्मिक आजादी बहाल किये जाने की मांग की। आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनो के अनेक प्रमुख पदाधिकारियो द्वारा संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ की सरकार को तानाशाह सरकार बताते हुए तुगलकी फरमान वापिस लिये जाने की मांग की गई। कार्यक्रम का संचालन सुभाष पाल ने तथा आभार प्रदर्शन साजी जान ने किया। इस आंदोलन मे अनिल रंगारी, राकेश प्रकाश, पलाश कुमार, रतन सोना, अरूण जान, मनोज चौधरी, मुकेश चौरे, एस.बाला, डेविड जान, जानसन, सैमुअल डेविड, मोहम्मद शाहिद, आलम अंसारी, दशरथ अहिरवार, भावना गेडाम, सोनम पिस्दा, पवन दिल्लीवार, श्याम कौशिक, विरेन्द्र बंजारे, एस.एल.मंडावी, के.आर.यादव सहित सैकड़ो की संख्या मे महिलाए पुरुष व बच्चे भी शामिल हुए।

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