
पाखंड और मृत्यु भोज सामाजिक अभिशाप, जिसे जादू समझा जाता है वह वास्तव में विज्ञान है: भंते बुद्ध प्रकाश
पाखंड और मृत्यु भोज सामाजिक अभिशाप, जिसे जादू समझा जाता है वह वास्तव में विज्ञान है: भंते बुद्ध प्रकाश
पाखंड और मृत्यु भोज सामाजिक अभिशाप, जिसे जादू समझा जाता है वह वास्तव में विज्ञान है: भंते बुद्ध प्रकाश

अमरदीप नारायण प्रसाद
विभूतिपुर, (समस्तीपुर)। विभूतिपुर प्रखंड क्षेत्र की सुरौली पंचायत (वार्ड 3, रविदास टोला) में गुरुवार को 70 वर्षीय मेघनी देवी के महापरिनिर्वाण के उपरांत एक अनूठी वैचारिक क्रांति देखने को मिली। यहाँ श्रद्धांजलि समारोह को केवल शोक तक सीमित न रखकर, समाज से अंधविश्वास मिटाने के लिए एक सशक्त जन जागरूकता कार्यक्रम में बदल दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षक अरविंद कुमार राम ने की तथा मंच संचालन अशोक कुमार राम द्वारा किया गया।
– महापुरुषों को नमन और भावभीनी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत तथागत गौतम बुद्ध, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और संत शिरोमणि रविदास जी के तैल चित्रों के समक्ष पुष्प अर्पित कर की गई। इसके बाद उपस्थित जनसमूह ने दिवंगत मेघनी देवी के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
– जादू नहीं, विज्ञान के प्रयोग हैं चमत्कार
जन जागरूकता कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, बिहार सरकार के पूर्व अल्पसंख्यक आयोग सदस्य सह ‘साइंस फॉर सोसाइटी’ (पटना) के भंते बुद्ध प्रकाश ने समाज में फैले पाखंड पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने वैज्ञानिक चेतना जगाते हुए कहा कि समाज में जिसे लोग अक्सर ‘जादू’ या ‘चमत्कार’ समझकर अंधविश्वास के जाल में फंस जाते हैं, वह असल में विज्ञान के सरल प्रयोग और रासायनिक क्रियाएं हैं। ढोंगी लोग विज्ञान के नियमों का सहारा लेकर जनता को गुमराह करते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे हर घटना के पीछे का वैज्ञानिक कारण समझें और अंधविश्वास से दूर रहें।
– मृत्यु भोज के बहिष्कार का संकल्प
मृत्यु भोज को सामाजिक अभिशाप बताते हुए उन्होंने कहा कि शोक संतप्त परिवार पर भारी-भरकम खर्च का बोझ डालना अमानवीय और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। भंते बुद्ध प्रकाश की इस तार्किक बात से प्रेरित होकर दिवंगत मेघनी देवी के पुत्र सुरेंद्र राम, पौत्र रविरंजन, शशिरंजन और संजीव राम सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने एक स्वर में मृत्यु भोज नहीं करने और पाखंड का बहिष्कार करने की ऐतिहासिक शपथ ली।
कार्यक्रम को प्रेमचंद सिंह, राम कुमार महतो, भजन राम, डॉ. राम स्वार्थ प्रसाद और भंते निरंजन बौद्ध ने भी संबोधित किया। मौके पर सुरेंद्र कुमार सदा, ममता देवी, राधा कुमारी, कंचन कुमारी, समिता कुमारी सहित भारी संख्या में लोग मौजूद थे।



